सोनभद्र

नगवां गांव के किसान ने पेश की मिसाल, छह साल में लाल चंदन से 50 लाख की संभावनाएं

म्योरपुर/सोनभद्र (विकास अग्रहरि)

कर्नाटक–आंध्र की तर्ज पर सोनभद्र में सफल हुआ लाल चंदन रोपण

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

सोनभद्र। ऊर्जा की राजधानी के रूप में पहचाने जाने वाला सोनभद्र का दक्षिणांचल क्षेत्र अब लाल चंदन की खेती के जरिए अपनी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से मिलती-जुलती जलवायु, मिट्टी, वन क्षेत्र और वर्षा के कारण यह इलाका लाल चंदन के पौधों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां लाल चंदन का रोपण न केवल संभव है, बल्कि यह किसानों के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

अब तक लाल चंदन के घने जंगल मुख्य रूप से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में ही देखने को मिलते रहे हैं, लेकिन सोनभद्र के दक्षिणांचल में भी इसकी संभावनाएं तेजी से उभर रही हैं। इसका जीवंत उदाहरण रेणुकूट वन प्रभाग के बघाडू वन रेंज अंतर्गत नगवां गांव में देखने को मिला है।

सेवानिवृत्ति के बाद शुरू की लाल चंदन की खेती

नगवां गांव निवासी किसान लालकेश्वर ने सेवानिवृत्त होने के बाद लगभग छह वर्ष पूर्व करीब ढाई लाख रुपये की लागत से लाल चंदन के पौधों का रोपण किया। जोखिम भरे इस निर्णय के बावजूद उन्होंने धैर्य और समर्पण के साथ पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल की। उनकी मेहनत का परिणाम आज सामने है—करीब 200 से अधिक लाल चंदन के पेड़ सफलतापूर्वक विकसित हो चुके हैं।

छह वर्षों तक किया सतत संरक्षण

किसान लालकेश्वर ने बताया कि लाल चंदन की वृद्धि धीमी जरूर होती है, लेकिन यदि पौधों का नियमित संरक्षण और निगरानी की जाए तो बेहतर परिणाम मिलते हैं। छह वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद अब पेड़ पूरी तरह विकसित हो चुके हैं। बाजार मूल्य के अनुसार इनकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी जा रही है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी वैकल्पिक और लाभकारी खेती के लिए प्रेरणा मिली है।

वन विभाग भी करेगा सहयोग

बघाडू रेंज की रेंजर सरिता गौतम ने किसान लालकेश्वर की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की हाई-वैल्यू वैकल्पिक खेती से किसानों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। उन्होंने बताया कि वन नियमों का पालन करते हुए और विभागीय सलाह लेकर लाल चंदन की खेती से अच्छी आमदनी संभव है। वन विभाग द्वारा नर्सरी में लाल चंदन के पौधे तैयार कर किसानों के साथ-साथ उपयुक्त वन क्षेत्रों में भी रोपण कराया जाएगा।

कोट

  • जिले का दक्षिणांचल का क्षेत्र कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से मिलता जुलता है। मिट्टी, वन क्षेत्र वर्षा एक ही तरह का है। ऐसे में लाल चंदन का पौध रोपण किसानों के आर्थिक विकास में बदलाव लाएगा
    कमल कुमार, डीएफओ, रेणुकूट।

लाल चंदन की खेती के सफल प्रयोग से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले वर्षों में सोनभद्र का दक्षिणांचल क्षेत्र न केवल ऊर्जा बल्कि लाल चंदन की खेती के लिए भी जाना जाएगा।

Vikash Agrahari

विकास अग्रहरी सोनभद्र म्योरपुर निवासी है। कम समय मे विकास अग्रहरी आज जिले की पत्रकारिता मे एक जाना पहचाना नाम है।

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