सोनभद्र

खनन व्यापारी जिलाधिकारी से मिले, डाला-बिल्ली क्रशर आनर्स एसोसिएशन ने रखी 13 सूत्रीय मांग

सोनभद्र (विकास द्विवेदी) डाला बिल्ली क्रशर आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में खनन पट्टा धारक शनिवार को जिलाधिकारी से मुलाकात किया। इस दौरान उन्होंने अपनी 13 सूत्रीय मांगें प्रस्तुत कीं। इस दौरान खनन क्षेत्र में आ रही समस्याओं से अवगत कराये हुए खनन कार्य पूरी तरह से बंद किए गए खनन पट्टों को पुनः मानक के अनुरूप, सभी सुरक्षात्मक तरीके से खनन कार्य शुरू कराने पर जोर दिया।
एसोसिएशन की मुख्य मांगों में से एक यह थी कि मुख्यमंत्री की इच्छानुसार खनिज क्षेत्र के विकास में तेजी लाने और उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर गिट्टी एवं बालू उपलब्ध कराने के लिए छोटे खनन पट्टों को ई-टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया जाए।
व्यापारियों ने यह भी मांग की कि किसानों की भूमिधरी जमीनों के बीच स्थित राज्य सरकार की छोटी-छोटी जमीनों को किसानों की जमीनों के साथ जोड़कर खनन पट्टा स्वीकृत किया जाए। इससे खनन नियमावली के तहत सुरक्षित तरीके से सड़क, पुल और भवनों के निर्माण के लिए किफायती दरों पर अधिक पत्थर/गिट्टी का उत्पादन हो सकेगा, जिससे सरकारी योजनाएं और विकास कार्य तेजी से पूरे हो सकें। एसोसिएशन ने छोटे खनन पट्टों के लिए भूमिधरी (काश्तकारी) जमीन को तत्काल ई टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने की अपील की। उनका तर्क था कि सोनभद्र की भूमिधरी जमीनों में पत्थर की उपलब्धता अधिक है और इस कदम से किसान अपनी जमीन खनन के लिए देने को उत्सुक होंगे। अन्य मांगों में, सीटीओ (संचालन की सहमति) प्राप्त करने की कार्यवाही क्षेत्रीय कार्यालय से पूरी की जाए और इस संबंध में 14 नवंबर 2025 को जारी आदेश को रद्द किया जाए, ताकि व्यापारियों को लखनऊ कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। क्रशर उद्योग को लघु उद्योग घोषित कर प्रदूषण से मुक्त माना जाए और लघु उद्योग की सभी सुविधाएं प्रदान की जाएं। इसके अलावा क्रशर एवं खनन उद्योग को लघु उद्योग मानते हुए बड़े खनिज उद्योग के नियमों से मुक्त किया जाए और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा जाए। दुद्धी तहसील में क्रशर लगाने की अनुमति प्रदान करने की भी मांग की गई। वन विभाग के रेंज ऑफिस और डीएफओ ऑफिस से पट्टों हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने की समय सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया गया। साथ ही, धारा 20 में प्रकाशित उन जमीनों को चिह्नित कर, जो जंगल से बाहर हो चुकी हैं, उन पर वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग की गई। जनपद सोनभद्र में धारा 20 में प्रकाशित जमीनों के बीच छोटे-छोटे रकबे की वन विभाग की जमीनें होने के कारण 100 मीटर के बफर जोन के चलते बड़े क्षेत्र का पट्टा नहीं हो पा रहा है, इस समस्या का समाधान भी मांगा गया। जिस पर जिलाधिकारी ने गंभीरता पूर्वक खनन व्यापारियों की समस्याओं को सुनते हुए आ रही समस्याओं के समाधान के लिए अपने स्तर से जल्द ही पत्र उच्चधिकारियों को अग्रेसित किए जाने का आश्वासन दिया है। इस मौके पर अभिषेक सिंह, अयोध्या दूबे, उस्मान अली, चंद्रभूषण गुप्ता, मिंटू राय, सुशील सिंह, अजय यादव, मिथिलेश अग्रहरि, ताड़केश्वर केशरी, देवेंद्र केशरी, सुरेश केशरी, शफीक अहमद, गणेश अग्रवाल, राहुल गोयल, अजय ओझा, नीरज भाटिया, कमलेश्वर केशरी, अयान अहमद आदि खनन पट्टाधारक उपस्थित रहे।

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