जांच टीम में वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थित पर याचिकर्ताओं का असंतोष, एनजीटी निर्देशों के बाद भी उदासीनता पर उठे सवाल
सिंगरौली परिक्षेत्र में वायु एवं जल गुणवत्ता की एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के निर्देश पर की जा रही स्थलीय जांच में जिम्मेदार अधिकारियों के शामिल न होने को लेकर याचिकाकर्ताओं ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। याचिकर्ताओं का कहना है कि जिले के खनन क्षेत्र में हुए बड़े हादसे के बाद भी जिला प्रशासन ने सबक नहीं लिया और अपनी जिम्मेदारियों को अधीनस्थ अधिकारियों पर छोड़कर लापरवाही का परिचय दिया है।एनजीटी में जनहित याचिका दाखिल करने वाले याचिकर्ता तथा सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद और कोषाध्यक्ष अशोक सिंह गोंड ने बताया कि स्थलीय जांच के दौरान जल निगम के अधिशासी अभियंता अरुण सिंह, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता तथा दुद्धी के नायब तहसीलदार तो मौजूद रहे, लेकिन क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी और एसडीएम मौके से अनुपस्थित रहे।याचिकर्ताओं का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण जांच में वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी गंभीर सवाल खड़े करती है। उनका आरोप है कि जिला प्रशासन जानबूझकर अपनी जिम्मेदारी से बचता दिख रहा है।जांच के दौरान याचिकर्ताओं ने अधिकारियों के सामने कई गंभीर पर्यावरणीय अनियमितताओं को रखा। उन्होंने बताया कि रिहंद जलाशय में राखड़ मिश्रित पानी बहाया जा रहा है, जो जलजीवों एवं स्थानीय बाशिंदों के लिए खतरा बना हुआ हैएनजीटी ने इस संबंध में पहले ही राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्थलीय जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन याचिकर्ताओं का कहना है कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण हालात जस के तस बने हुए हैं।सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी ने कहा कि खदानों में गलत रिपोर्ट लगाकर खनन विभाग के अधिकारियों ने जिस तरह जिलाधिकारी की छवि धूमिल की और बाद में खनन हादसा हुआ, उससे जिला प्रशासन की कार्यशैली पर पहले ही सवाल खड़े हो चुके हैं। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधीनस्थ कर्मचारियों की रिपोर्ट पर भरोसा करना कठिन होता जा रहा है।याचिकर्ताओं ने मांग की है कि एनजीटी द्वारा निर्धारित जांच टीम में वरिष्ठ अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय खतरों का सही आकलन हो सके।



