सामूहिक रूप से चिंतन कर समाज ही नदियों को कर सकता है पुनर्जीवित

झारो खाश पहुंची नदी यात्रा की टीम देखे हालत ,ग्रामीणों से की चर्चा,
लौवा नदी पर बने करोड़ों के चेक डैम टूट चुके पर किसी ने नहीं ली सुधि
म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
म्योरपुर स्थानीय ब्लॉक के रासपहरी से रविवार को शुरू की गई नदी यात्रा सोमवार को झारो खास और झारो कला पहुंची लगभग दस किमी लंबी नदी यात्रा के दौरान दोनों गांवों में मनरेगा से बने लगभग आधा दर्जन चैक डैम बहुत पहले के वर्षों में टूट चुके है जबकि नदी किनारे लोगों का कब्जा हो चुका है।साल भर बहने वाली यह नदी अब दस माह बाद सुख जाती है।ग्रामीणों ने बताया कि नदी की मछलियां लगभग विलुप्त हो चली है और नागर मोथा समाप्ति की ओर है गर्मी की सब्जी अब नहीं कर पाते है।यात्रा के बाद हुई ग्रामीणों के साथ बैठक में शुभा प्रेम,डा अनिल गौतम,ने नदी के पुर्नजीवित किए जाने पर मंत्रणा की और ग्रामीणों के विचार जाने। शुभा ने नदियों के इतिहास और नदियों से निर्भरता की जरूरत पर चर्चा की।कहा कि केवल दोहन से हम पानी को बहुत दिन नहीं संयोज पाएंगे ।धरती के गोद में पानी भरना ही होगा। डॉ गौतम ने कहा कि अगर नदी में मिलने वाले नालों को रोक कर जमीन में पानी डाले तो नदी पुनर्जीवित होगा।कहा कि हमें पानी पर आत्म निर्भरता बढ़ानी है तभी हम पानी संकट से मुक्त हो सकते है। कहा कि नदियों का अतिक्रमण सरकार के बजाय गांव खुद रोके तो एक बड़ा मिशाल बन सकता है।नदी यात्रियों ने इस दौरान जल है तो जीवन है। का नारा लगाया।मौके पर प्रेम नारायण,सुरेश,पूर्व प्रधान हृदय नारायण,राम वृक्ष ,उमेश चौबे, दुर्गावती, विजय कुशवाहा हीरावती,फूलवती, दीप नारायण, जगत नारायण गोंड, केवला दुबे,जगत नारायण विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे।
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