ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लोढ़ी मे बने ड्राइंविंग सेंटर पर देना होगा टेस्ट, कैमरे में रिकार्ड होता रहेगा पूरा टेस्ट

सोनभद्र (विकास द्विवेदी) एक अगस्त 2025 से ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर टेस्ट देना होगा। टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चलाने में पास होंगे तब ही आपका ड्राइविंग लाइसेंस बनेगा। यह दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया हर तरह के वाहनों का ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों के लिए अनिवार्य रहेगा। यह टेस्ट बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, स्वचालित रूप से ड्राइविंग कौशल का मूल्यांकन करेगा।
जनपद के मुख्यालय स्थित छपका पावर हॉउस के पीछे बने ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (एडीटीसी) में एक अगस्त 2025 से ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों के लिए यह नई व्यवस्था लागू होगा।
पीपीपी मॉडल पर बने तेज सिंह प्रत्यापन चालन प्रशिक्षण केंद्र लोढ़ी में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग कार्य किया जाएगा। दरअसल जनपद में अभी तक मैनुअल तरीके से ड्राइविंग टेस्ट होता है, जहां बहुत से ऐसे आवेदक होते है, जिन्हें गाड़ी पूरी तरीके से चलाने भी नहीं आता है फिर भी वह डीएल बनवाने के फिराक में लगे रहते है। इसी पर रोक लगाने के लिए और सड़क सुरक्षा को और भी मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और तेज सिंह मोटर ट्रेनिंग सेंटर से एक समझौता के तहत 2024 में एक पहल शुरू हुई। इस पहल के जरिए ऐसा ड्राइविंग टेस्ट बनाए गया है, जहां कैमरे और कंप्यूटर की मदद से आवेदकों का टेस्ट लिया जाता है। आवेदकों को तय समय में ट्रैक पर वाहन चलाने से संबंधित टेस्ट देना होगा। हर गतिविधि कैमरे में कैद होगी। सारी व्यवस्था कम्प्यूटरीकृत रहेगी और 7 दिन के भीतर पास हुए आवेदकों को डीएल मिल जायेगा।
टेस्टिंग ट्रैक एडवांस टेक्नोलॉजी से है लैस
सोनभद्र। ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस है। जिसमें टेस्टिंग के दौरान ट्रैफिक, सिग्नल, रिवर्स मोड, एक्सेस कंट्रोल, एंट्री, एग्जिट, वीडियो एनालिटिक्स टेक्नोलॉजी सहित अन्य तरह के आधुनिक व्यवस्था रहेंगे।
सड़क दुर्घटना में कमी लाने को आएगी यह व्यवस्था
सोनभद्र। संभागीय निरीक्षक पियूष कुमार ने बताया कि डीएल निर्गत करने से पहले आवेदकों को ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चलाकर परीक्षा लेने की व्यवस्था से दक्ष लोगों को ही डीएल मिल पाएगा। सड़क दुर्घटना में कमी लाने के उद्देश्य से ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग की व्यवस्था बहाल की जा रही है।
वाहन चलाने में होना पड़ेगा कुशल
सोनभद्र। ऑटोमेटेड टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चलाने की व्यवस्था होने पर डीएल बनाना आसान काम नहीं रहेगा। पहले वाहन चलाने में लोगों को कुशल होना पड़ेगा। उसके बाद ही वे ट्रैक पर कुशल तरीके से वाहन चलाकर पास हो सकेंगे। इसके लिए लोगों को वाहन चलाने का ट्रेनिंग देने वाले स्कूल में जाकर वाहन चलाना सीखना पड़ेगा। खासकर ट्रक, बस जैसे बड़े भारी वाहन चलाने में कुशल चालक के आने से दुर्घटना कम होगी।
आवेदक वाहन चलाने में दक्ष हैं या नहीं होगी जांच
सोनभद्र। आवेदक वाहन चलाने में दक्ष हैं या नहीं उसकी जांच ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर वाहन चलाकर की जाएगी। अगर आवेदक वाहन चलाने में पास हो जाएगा तो उसे कम्प्यूटरीकृत ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) निर्गत किया जाएगा। फेल होने वाले आवेदक को दोबारा मौका मिलेगा पर उसके लिए समय अवधि निर्धारित रहेगा।




