हम तो सीसा है कोई सवरे कोई सजावे हमे क्या

राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में सुविख्यात कवियों ने बड़ी रचनाएं,
म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
म्योरपुर ब्लॉक के गोविंदपुर स्थित सामाजिक संस्थान बनवासी सेवा आश्रम में साहित्य और समाज के बीच गहरी घनिष्ठता लाने के उद्देश्य से आयोजित साहचर्य, साहित्य और समाज पर केंद्रित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन इफ्टा (भारती नाट्य कला संघ) के अध्यक्ष के अध्यक्षता में शनिवार की रात आयोजित किया गया जिसने ख्याति प्राप्त कवियों ने समाज में घटित हो रहे घटनाओं और पर्यावरण,सामाजिक बदलाव,बदलते संस्कृति, विस्थापान जैसे विषयों पर रचनाएं प्रस्तुत की, समसे पहले जबलपुर से आई युवा कवित्री और थियेटर कर्मी अलंकृति श्रीवास्तव ने युवाओं और किशोरों को सिख देती ये कविता प्रस्तुत की फूल सिखाते है,थपेड़े सहना ,… लखनऊ से आई सुशीलपुरी ने वसंत की पदचाप ,नदी की विनम्र स्तुतियां है..प्रसूत की हिन्दी और बघेली के रचनाकार अभय तिवारी, ने बिगड़ते गांव की परम्परा पर कहा पूछो न मेरा गांव,.. राम नरेश तिवारी ने नकली छात्र,नकली शिक्षक और नकली नोट की प्रस्तुति दे दर्शकों को पेट के बल हंसने पर मजबूर किया।डा संतोष तिवारी ने विस्थापन और बढ़ते शहरी कारण को लेकर अपनी रचना पड़ी शहर के बढ़ते आकर के बारे में सोचना चाहिए, बिगड़ जाएंगे प्रकृति के … संचालन कर रहे विवेक चतुर्वेदी ने प्रकाशित संग्रह स्त्रियां घर लौटती है से स्त्रियों के घर की मौजूदगी को लेकर रचना पड़ी, मुख्य अतिथि अष्टभुजा, केशव तिवारी भागलपुर की सुजाता चौधरी, इंदु श्रीवास्तव संतोष द्विवेदी आदि ने अपनी रचनाओं के जरिए श्रोताओं का मन मोहा,।गजल गीत,व्यंग के जरिए कवियों ने अलग अंदाज में सामाजिक सरोकार की प्रतीति दी।शुभा प्रेम ने सभी का आभार व्यक्त किया। मौके पर डा लखन राम जंगली विमल सिंह ,जगत नारायण विश्वकर्मा,देवनाथ ,शिव शरण सिंह युवा कवि यथार्थ विष्णु, वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यनारायण,उमेश चौबे, रमेश यादव,महेंद्र गुप्ता, प्रदीप पांडेय, सुरेश कुमार, आदि मौजूद रहे।
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