सोन संगम की तरफ से कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर विचार गोष्ठी एवं काव्य संध्या का आयोजन किया गया

शक्तिनगर/सोनभद्र सोन संगम की तरफ से कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर विचार गोष्ठी एवं काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रेमचंद की छायाचित्र पर पुष्पांजलि माल्यार्पण तथा डाक्टर बृजेंद्र शुक्ला एवं प्रज्ञा चक्षु रविंद्र मिश्रा के द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ अतिथियों का स्वागत डा मानिक चंद पांडेय ने किया। स्वागत के क्रम में स्वागत के क्रम में उन्होंने आयोजन के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा की प्रेमचंद 21वीं शताब्दी के तीसरे दशक में भी प्रासंगिक हैं संपूर्ण विश्व में प्रेमचंद का साहित्य आज भी पढ़ा जाता है और जो समस्याएं उन्होंने अपनी रचनाओं में चित्रित किया है वह आज भी किसी ने किसी रूप में देखने को मिलता है इसी क्रम में अपने विचार करते हुए सरस सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य निर्बल के लिए ताकत प्रदान करता है तथा सामाजिक कुरीतियों से लडने की साहस देता है।प्रेमचंद अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को सामाजिक प्रदूषण से मुक्त रखना चाहते थे और यही उनका उद्देश्य था ।प्रेमचंद का साहित्य हमें जीवन में संयमित, ईमानदार तथा सच्चा इंसान बनने की शिक्षा देता है।डा अनिल कुमार दूबे ने प्रेमचंद को कालजई रचना बताया।
इस अवसर पर इस अवसर पर सोन संगम शक्ति नगर के अध्यक्ष श्री विनय कुमार अवस्थी जी को भावभीनी विदाई दी गई। विदाई के पूर्व,आदरणीय विनय कुमार अवस्थी जी द्वारा रचित दो काव्य संग्रह सत्य का साक्षी तथा शाश्वत का विमोचन उपस्थित विशिष्ट अतिथियो के कर कमलों द्वारा किया गया।
इस विदाई के अवसर पर सोनभद्र जिले के जाने माने वरिष्ठ कवि अपने भाव को इस तरह प्रस्तुत किया
वक्ते जुदाई आंख भर आई।
यह रस्मे विदाई आंख भर आई।।
नवोदित रचनाकार प्रिया गुप्ता ने अपनी भावना को कुछ इस प्रकार व्यक्त किया
चुप रहकर भी हो जाती है
बाते सारी हर बार बोलना,
जरूरी नहीं होता।
तुम्हारे जरा
छुने से भी भर जाते हैं
सारे जख्म हर बार
मरहम लगाना जरूरी नहीं होता।
विजयलक्ष्मी पटेल ने अपनी कविता कुछ इस प्रकार अंदाजी बया
किया
मैंने महावर लगे पांव से बाधी थी तेरे घर की चौखट ।
बनकर लक्ष्मी तेरे घर की
तब मेरे भाग्य ने ली थी करवट।
डा विजेंद्र कुमार शुक्ला अपनी कविता लोगों के सामने इस विषय पर रखी कि
आइए हम सब मिलकर अनुबंध ये करे।
सौ मानस्य से बयमनस्य की खइया भरे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विनय कुमार अवस्थी ने पूरा संगीत विषय मुंशी प्रेमचंद के लिए अपना श्रद्धा सुमन इन शब्दों में अर्पित किया है
प्रेमचंद से कथाकार को, एक बार प्रभु जन्म दिलाए।
आत्मकथा आत्मकथा खुद सहज रूप से उनका दृढ़ व्यक्तित्व बनाएं।
नमन करो ऐसे लेखक जो ,सम्राट कहानी एकांकी
उनके जन्मदिवस पर उनकी चरण धूलि को शीश लगाए।
अन्य कवियों में अन्य रचनाकारों में रमाकांत पांडे रविंद्र मिश्रा के साथ-साथ अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का संचालन श्रीमती विजयलक्ष्मी पटेल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री विजय कुमार द्वारा विजय कुमार दुबे के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में श्री राजीव कुमार, प्रधानाचार्य सरस्वती इंटर कालेज खडीया बाजार, गुलाब सिंह, डा रणवीर सिंह डा छोटेलाल ,उदय नारायण डा अपर्णा त्रिपाठी, सीताराम अवधेश, मुकेश रेल, डा अविनाश कुमार दुबे, डा मनोज कुमार गौतम, सरवन कुमार, मनोरमा, बी बी पटेल, पप्पू चाय, अंकित कुमार,पवन कुमार इत्यादि लोग उपस्थित रहे।





