सोन संगम के तरफ से महर्षि वेदव्यास की जयंती मनाई गई

शक्तिनगर/सोनभद्र सोन संगम के तरफ से महर्षि वेदव्यास की जयंती मनाई गई।
गुरु पूर्णिमा के पुनीत अवसर पर जहां अपने अपने गुरुओ को प्रणाम किया गया ,वही सोन संगम के अध्यक्ष की भी मनाई गई जयंती।
साहित्यिक सामाजिक संस्था सोनू संगम शक्तिनगर की ओर से महर्षि व्यास जी की जयंती एवं गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संगोष्ठी तथा काव्य संध्या का आयोजन किया गया कार्यक्रम के प्रारंभ में विषय की स्थापना तथा अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ मानिक चंद पांडेय ने कहा कि, आज का यह दिन हिंदू धर्म साधना में बहुत ही पवित्र है आज के दिन जहां एक और महाभारत के रचयिता ,महर्षि वेदव्यास की जयंती है ,वहीं दूसरी ओर गुरु पूर्णिमा भी है। हिंदू समाज में गुरु का स्थान सर्वश्रेष्ठ है। दुनिया का सबसे श्रेष्ठ एवं ईश्वर से भी बड़ा गुरु होता है ,जो अपने शिष्य को अंधकार से निकाल कर ,प्रकाश की ओर ले जाता है ।एक साथ सौ सूर्य उदित हो जाए किंतु, मानव के अंतःकरण के अज्ञान की कलिमा को नही मिटा सकते है। केवल गुरु ही अपने ज्ञान के द्वारा अपने शिष्य को मुक्ति दिला सकता हैं। ऐसा माना जाता है कि, गुरु के समान इस संसार में मानव का कोई दूसरा कोई सगा नहीं है ,क्योंकि गुरु ही इस संसार से मानव को मुक्ति का रास्ता प्रदान करता है।
इस अवसर पर सोंन संगम के अध्यक्ष ,श्री विनय कुमार अवस्थी जी का जन्मदिन भी मनाया गया। यह संयोग ही था, क्योंकि गुरु पूर्णिमा के दिन ही उनकी जन्म की तिथि होती है । अतःउपस्थित लोगों द्वारा केक काट कर,उनका जन्म दिन मनाया गया, तथा उनके दीर्घायु होने तथा निरंतर साहित्य सृजन में रत रहने की कामना की गयी।
काव्य गोष्ठी की आगाज करते हुए डॉ बृजेंद्र शुक्ला ने अपनी पंक्तियां वाग्देवी को प्रस्तुत किया
मैं तो कब से तेरी शरण में हूं,
हे माते मुझे भी तो ज्ञान दे।
ति मिर मन का हरण कर,
नित नवल धवल प्रकाश दे।।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री विनय कुमार अवस्थी ने अपने जन्मदिन के अवसर पर अपनी भावना को कविता के माध्यम से कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया
काव्य सृजन हिन्दी में करना,
शौ क हमारा रहा निरंतर।
जन्म दिन पर नेह आपका,
याद रखू गा मै जीवन भर।।
अपनी ग़ज़ल एवं कथा के लिए मशहूर शायर वह बनारसी ने कुछ इस अंदाज में अपनी गजलों को पेश किया
अब कहा रोक थाम होता है,
दिन में रातों का काम होता है।
सोनभद्र क्षेत्र के हिंदी के वयोवृद्ध कवि, कृपाशंकर उर्फ माहिर मिर्जापुरी ने अपनी पंक्तियां कुछ इस तरह लोगों के सामने बया किया
अगर मरना जरूरी है तो ,देश के लिए मरो।
मगर भूल कर कभी भी खुदकुशी न करो। ।
अतिथियों का स्वागत श्री विजय कुमार दुबे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री बद्री प्रसाद केसरवानी ने किया ।इस अवसर पर डॉ छोटेलाल , रंज कुमारी,वंदना पनिका,मुकेश रेल, सोनू कुमार सीताराम, नंद किशोर इत्या दि लोग उपस्थित रहे।





