मिट्टी और बांस को व्यवसायिक और रोजगार परख बनाने के लिए प्रशिक्षण
दक्षिणांचल के कारीगरों ने ने एम पी और महाराष्ट्र में लिया प्रशिक्षण

और सुराही का प्रशिक्षण महिला ट्रेनर और उनके पति द्वारा ले रहे है।साथ में कारीगरों को लेकर गए उमेश चौबे ने बताया की मिट्टी से बने नए नमूने सिख कर मिट्टी कारीगर उसे अपने क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलासेंगे,क्षेत्र में इसकी मांग भी है और लोग पुराने जमाने की तरफ लौट भी रहे है।बताया की हांडी का चावल,और कड़ाही की दाल स्वादिष्ट होता है और इसकी मांग भी बढ रही है।बताया की चार दशक पहले क्षेत्र में लोग मिट्टी के वर्तन पर ज्यादा निर्भर थे।जमाने के हिसाब से मिट्टी के बने विभिन्न वर्तनो और खिलौनों को नया रूप देकर रोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है।दुसरी बांस के कारीगरों की टीम महाराष्ट्र के चंद्रपुर,वर्धा,नागपुर,अमरावती जिलों में बांस से बने कुर्सी,सोफा ,बेड, घरों के दरवाजे ,खिड़की, सीढी,के साथ बांस के गहने ,खिलौना, आदि बनाने वाले कारीगरों से मिला और बात चीत करने के साथ बांस के उपरोक्त वस्तुओ को बनाने में प्रयुक्त किए जाने वाले केमिकल्स की जानकारी ली।कारीगरों के साथ गए अशोक मरकाम ने बताया कि क्षेत्र में इसका व्यवसायिक रूप से प्रयोग होगा।इसकी मांग बहुत है और नए डिजाइन आकर्षण का केंद्र भी बनेगा। और लोगो को रोजगार भी मिलेगा।




