इश्क में दिल ने ली अंगड़ाई, वो भी इतने रात गए…….

शहरे मदीना की याद आई, वो भी इतने रात गए……
मकतब जब्बरिया में खत्म हुई तरावीह की विशेष नमाज
दुद्धी, सोनभद्र (मु.शमीम अंसारी)। रमजान शरीफ के मुकद्दस माह में अदा की जाने वाली तरावीह की खास नमाज स्थानीय मकतब जब्बरिया मदरसे में शनिवार की रात मुकम्मल हो गई। मात्र 9 दिन में खत्म कुरान कर तरावीह की नमाज अदा करने वाले नमाजियों को लेकर इंतजामिया कमेटी के तत्वाधान में नातख़्वानी व दुरुदो सलाम की महफिल मुनक़्क़ीद की गई। महफिले मिलाद का आगाज अपनी नात शरीफ से करते हुए रिजवानुद्दीन ने “शहरे मदीना की याद आई, वो भी इतने रात गए, इश्क में दिल ने ली अंगड़ाई, वो भी इतने रात गए जैसी नात जब हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की शान में पढ़ी तो बज्म में शामिल एक-एक शख्स इस्लामी रंग में सराबोर हो गया। नारे तकबीर अल्लाह हू अकबर, नारे रिसालत या रसूल अल्लाह जैसे इस्लामी नारों के बीच यूनुस खान ने मदीना, मदीना, चलो चलके देखें दयारे मदीना, वहीं पर मिलेंगे ताजदारे नबी जैसी नात बारगाहे रसूल में पेश की। कार्यक्रम के दौरान तरावीह की नमाज अदा कराने वाले हाफिज तौहीद साहब को तोहफा देकर उनकी हौसला अफजाई व खैर मकदम किया गया। हाफिज तौहीद साहब ने खत्म कुरान के बाद कौम के लोगों को सिराते मुस्तकीम पर चलने, आपसी मेल-मुहब्बत, मुल्क की तरक्की की रूहानी दुआख़्वानी की। मिलाद शरीफ में तकरीर करते हुए जामिया रिजविया दीघुल के मुदर्रिस मौलाना कयामुद्दीन ने तरन्नुम से कलामे आला हजरत सुनाते हुए रमज़ान की फजीलतों पर बयान दिया। दारुल उलूम कादरिया नूरिया के मुदर्रिस मौ. नजीरुल कादरी ने अपनी तकरीर में इसे खत्म तरावीह की जगह खत्म कुरान की संज्ञा देते हुए कहा कि तरावीह तो ईदुल फित्र का चाँद नजर आने तक अनवरत चलती है। जो लोग आज खत्म कुरान मुकम्मल कर रहे हैं वो आगे भी सूरह तरावीह में शिरकत करते रहें। महफिले मिलाद की निजामत (संचालन) हाफिज जहांगीर ने किया। इस अवसर पर हाजी सैय्यद फैजुल्लाह, डॉ एजाजुल हुदा, कलीमुल्लाह खान, आदिल खान, रिजवान अहमद, मकतब कमेटी के सह सचिव सरफराज शाह, मेराज अहमद, मुर्तजा, मु.साबिर, आरिफ अंसारी आदि लोग उपस्थित थे।



