भगवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित व श्री कृष्ण सुदामा की स्नेहपूर्ण मित्रता का भावपूर्ण वर्णन

रेणुकूट/सोनभद्र (रामकुमार गुप्ता) सनातन एकता सेवा संघ और सुगम्या फाइनेंस द्वारा समन्वय परिवार में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस की कथा व्यास पूज्य गुरुदेव अखिलेश्वरानंद महाराज जी ने सुदामा चरित का मार्मिक प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण और सुदामा की आदर्श मित्रता का जीवंत वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा में बताया गया कि सुदामा की निर्धनता और उनके निष्कपट प्रेम से श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न हुए। द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा का आदर-सत्कार कर यह संदेश दिया कि सच्ची मित्रता में वैभव, पद और ऐश्वर्य का कोई महत्व नहीं होता। सुदामा द्वारा लाए गए चावल को प्रेमपूर्वक स्वीकार करना और उनके चरण धोना, भगवान की करुणा और विनम्रता का प्रतीक बताया गया।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण–सुदामा की मित्रता समाज को यह शिक्षा देती है कि अहंकार त्याग कर प्रेम, सेवा और विश्वास को अपनाना ही सच्चा धर्म है। सुदामा को बिना मांगे ही वैभव का वरदान मिलना निष्काम भक्ति का फल बताया गया।
विश्राम दिवस पर भजन-कीर्तन, आरती और महा प्रसाद वितरण हुआ जिसमें हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा में मुख्य अतिथि पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष निशा सिंह, समाज सेवी मनोज पांडे तथा मुख्य यजमान अवधेश मिश्र,राज वर्मा,सतीश तिवारी के साथ राकेश त्रिपाठी, मिथलेश मिश्र, आशीष मिश्र संतोष पांडे, मनोज त्रिपाठी बाबा उदयनाथ मौर्य, संतोष सिंह मनीष मिश्रा,वीर बहादुर सिंह, सीता गुप्ता, गीता सिंह, सविता सिंह समेत समन्वय परिवार के सदस्य गण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा में भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति के तरफ से मस्तराम मिश्रा ने आभार व्यक्त किया।




