सोनभद्र

सेपिएंट इंटरनेशनल अकादमी मे दीपावली समारोह का भव्य आयोजन

सेपिएंट इंटरनेशनल अकादमी मे दिनांक 18 अक्टूबर 2025 को पारंपरिक भारतीय त्योहार दीपावली के उपलक्ष्य में एक विविध सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से युक्त भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और सृजनात्मकता का विकास करना था।विद्यालय के भव्य प्रांगण में सुबह से ही उत्सवमयी वातावरण देखने को मिला। रंग बिरंगे सजावटों, दीपों और पारंपरिक कलाकृतियों से सजा स्कूल परिसर न केवल विद्यार्थियों बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और अतिथियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा। दीपावली के इस पावन अवसर को पूरी श्रद्धा, उल्लास और रचनात्मकता के साथ मनाया गया।इस भव्य आयोजन की रूपरेखा और सफलता का श्रेय जाता है विद्यालय के कुशल नेतृत्व को।माननीय प्राचार्या श्रीमती रश्मि द्विवेदी के मार्गदर्शन में कार्यक्रमों का सुनियोजित संचालन हुआ, जिससे सभी गतिविधियाँ सुव्यवस्थित और समयबद्ध रूप से संपन्न हुईं।उप-प्राचार्या श्रीमती काजल किरण ने प्रत्येक सांस्कृतिक गतिविधि में विशेष योगदान देते हुए आयोजन को पूर्णता प्रदान की।विद्यालय के अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपनी कक्षाओं के अनुसार विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इन गतिविधियों का उद्देश्य न केवल छात्रों की सृजनात्मक क्षमता को विकसित करना था, बल्कि उन्हें भारतीय परंपराओं से भी जोड़ना रहा।नर्सरी से यू के जी के छोटे बच्चों ने रंग-बिरंगे कागजों और सजावटी सामग्री की सहायता से सुंदर और आकर्षक दीये बनाए। यह गतिविधि नन्हें विद्यार्थियों के लिए दीपावली के प्रतीक ‘दीये’ से जोड़ने का एक रचनात्मक माध्यम बनी। बच्चों ने शिक्षकों के मार्गदर्शन में दीयों को रंगों, कतरनों और चमकीले सजावटी चीजों से सजाया।इस गतिविधि से बच्चों में रंगों की समझ, संयोजन की कला और बारीकी से काम करने की दक्षता का विकास हुआ।कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों ने विभिन्न अनुपयोगी वस्तुओं जैसे पुराने कपड़े, रिबन, पत्तियाँ, कार्डबोर्ड आदि से आकर्षक तोरण बनाए। इन तोरणों को विद्यालय के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर सजाया गया, जिससे विद्यार्थियों के कार्यों को सभी ने सराहा।इस प्रतियोगिता ने बच्चों को यह सिखाया कि रचनात्मकता में संसाधनों की कमी बाधा नहीं होती, बल्कि नवाचार से ही श्रेष्ठ कला जन्म लेती है।कक्षा 3 और 4 के विद्यार्थियों ने मिट्टी का उपयोग करते हुए दीपावली से संबंधित पाँच वस्तुओं – जैसे दीया, लक्ष्मी-गणेश मूर्ति, पटाखा, पुष्प थाली और घर की सजावट से जुड़ी वस्तुएँ – तैयार कीं। इन कलाकृतियों को विद्यालय प्रांगण में एक प्रदर्शनी के रूप में प्रदर्शित किया गया, जिसे अभिभावकों और अतिथियों ने खूब सराहा।
यह प्रतियोगिता बच्चों के हाथों की कुशलता, उनकी कल्पनाशीलता और भारतीय त्योहारों के प्रतीकों की समझ को उजागर करने का माध्यम बनी।
“इंटरहाउस प्रतियोगिता”
मे छात्रों ने रामायण के चार प्रमुख अध्यायों पर आधारित नाट्य प्रस्तुति में भाग लिया, जिसे विद्यालय के चार सदनों के बीच प्रतिस्पर्धा के रूप में आयोजित किया गया-
1. विवेकानंद सदन
“भगवान श्रीराम का जन्म और उनका दिव्य उद्देश्य” – इस मंचन में भगवान राम के जन्म और उनके अवतार के उद्देश्य को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
2. कलाम सदन
“सीता स्वयंवर” – छात्रों ने भगवान राम और सीता के मिलन का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया, जिसमें भारतीय विवाह परंपरा की झलक भी देखने को मिली।
3. रामानुजन सदन
“वनवास और माता सीता का हरण” – इस प्रस्तुति में राम, लक्ष्मण और सीता का वनगमन और रावण द्वारा सीता हरण की कथा को भावनात्मक रूप से चित्रित किया गया।
4. आर्यभट्ट सदन
“महायुद्ध और अयोध्या वापसी” – इस अंतिम मंचन में राम-रावण युद्ध और राम की अयोध्या वापसी को विजयदशमी और दीपावली से जोड़ा गया।
इन प्रस्तुतियों में पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य, संवाद और मंच सजावट ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।छात्र-छात्राओं की अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी और भाव-प्रदर्शन ने यह सिद्ध किया कि रामायण आज भी हमारी संस्कृति में जीवंत है।कक्षा 9 से 12 के वरिष्ठ वर्ग के छात्रों ने ‘संस्कृति संगम’ थीम पर रंगोली प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें विभिन्न भारतीय परंपराओं – जैसे पंजाबी, गुजराती, मराठी, असमिया, दक्षिण भारतीय शैली – को एक साथ रंगों में पिरोया गया।इस प्रतियोगिता की विशेष शर्त यह रही कि रंगोली निर्माण में केवल प्राकृतिक सामग्री जैसे फूल, पत्तियाँ, रंगीन चावल और रेत का प्रयोग किया गया। इससे न केवल पर्यावरण संवेदनशीलता को बढ़ावा मिला, बल्कि बच्चों में भारतीय शिल्प और कला के प्रति संवेदनशीलता भी जागृत हुई।प्रतियोगिता के अंत में बनाई गई रंगोलियों ने विद्यालय परिसर को एक जीवंत कला प्रदर्शनी में परिवर्तित कर दिया। विद्यालय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि सभी बच्चों को उनके प्रयास के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिससे उनके मनोबल को बल मिले।
समापन समारोह में सभी शिक्षकगण और विद्यार्थीगण ने मिलकर दीयों के साथ सामूहिक दीप जलाकर “दीपोत्सव” को सार्थक बनाया।इस आयोजन का उद्देश्य न केवल दीपावली को हर्षोल्लास से मनाना था, बल्कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों को हमारी संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी था।
सेपिएंट इंटरनेशनल अकादमी का यह आयोजन एक प्रेरणास्पद उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के पोषण का केंद्र बन सकता है। इस आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभाओं को उजागर किया, बल्कि उन्हें भारतीय परंपराओं से भी गहराई से जोड़ा।विद्यालय द्वारा इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से एक सशक्त शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिसमें विद्यार्थी केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास की दिशा में आगे बढ़ते हैं। विशेष रूप से दीपावली जैसे त्योहार के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राकृतिक सामग्री के उपयोग, पर्यावरण सुरक्षा, सांस्कृतिक विविधता के सम्मान और कला-संवेदना का अभ्यास कराया गया, जो आज की शिक्षा का अभिन्न उद्देश्य होना चाहिए।
विद्यालय प्रबंधन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजनों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी रूप से आयोजित किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को एक समग्र शिक्षण अनुभव मिल सके। भविष्य में भी विद्यालय इसी प्रकार की पहल कर छात्रों को भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के संगम से जोड़ता रहेगा।
प्रधानाचार्या श्रीमती रश्मि द्विवेदी ने भी इस अवसर पर सभी शिक्षकों और छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया जिनके सहयोग और समर्पण से यह आयोजन इतनी सफलता के साथ संपन्न हुआ।सभी ने एकमत से कहा कि इस प्रकार का आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है और अन्य शिक्षण संस्थानों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

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