सोनभद्र

विभाजन के खिलाफ थे , गांधी और भगत सिंह

राष्ट्र को समृद्ध और विकसित बनाना है तो मानवता बढ़ानी ही होगी।

बनवासी सेवा आश्रम में गांधी और भगत सिंह बदलाव के पुल पर विमर्श का आयोजन

म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)

म्योरपुर ब्लॉक के गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम के विचित्रा महाकक्ष में आजादी के महान सपूत भगत सिंह के शहादत दिवस पर गांधी और भगत सिंह बदलाव के पुल विषय पर विमर्श का आयोजन किया गया।जिसमे दोनों के विचारों,की समानता और अंतर के बीच राष्ट को एक सूत्र में पिरोने और आजादी की लड़ाई में दोनों की भागीदारी पर चर्चा की गई। भागलपुर बिहार की गांधी विचारक और लेखिका कवित्री सुजाता चौधरी ने कहा कि गांधी और भगत सिंह दोनो संप्रदायवाद , जातिबाद और देश के बंटवारे के खिलाफ थे। दोनों का मानना था कि हम मनुष्य के बीच मानवता नहीं रहेगा तो राष्ट्र सुरक्षित नहीं रह सकता न ही विकसित राष्ट की कल्पना की जा सकती है। दोनों में विचारों का अंतर था गांधी अहिंसा और भगत सिंह हिंसा के रास्ते आजादी पाने के पक्षधर थे। लेकिन भगत सिंह ने फांसी से पहले कहा था कि अहिंसा के जरिए ही देश को जगाया जा सकता है। सुजाता ने तमाम पत्रों और उस दौर के लेखकों ,किताबों का उदाहरण देते हुए कहा कि भगत सिंह ने अहिंसक बम फेक कर अंग्रेजों को चेतावनी दी थी अन्यथा वे अंग्रेज अधिकारियों को भी निशाना बना सकते थे।इससे पहले भगत सिंह और उनका एक साथी साबरमती आश्रम में गांधी से मिलने भी गए थे। उन्होंने बताया कि भगत सिंह को बचाने में गांधी ने प्रयास किया था लेकिन भगत सिंह के सहयोगी साथियों ने अग्रेजों के पक्ष में बयान दिया इसके वजह से फांसी देने का मजबूत आधार अंग्रेजी हुकूमत को मिल गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गांधी को नापते है। जो उनके तिनके के बराबर नहीं है । उन्होंने कहा कि कट्टर तत्वों ने देश का विभाजन कराया।और अंग्रेजों ने चाल ऐसी चली थी।गांधी विभाजन के पक्ष में नहीं थे। जिस तरह कृष्ण महाभारत नहीं रोक सके उसी तरह गांधी विभाजन नहीं रोक सके।लेकिन समझने की बात है कि कृष्ण का महत्व घटा ना गांधी का।

इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रसिद्ध रंगकर्मी प्रसन्ना ने युवाओं का आह्वान किया कि वे आज की भारत का सपना देखे और उसने रंग भरे।जिससे हमारा देश मजबूत और सम्प्रदाय विहीन मानवता का मिशाल बने और प्रगति करे। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं की भाषा में युवाओं से संबंध स्थापित करने है। उनकी एक अलग दुनिया है जिसे हमें समझना है। जो शहर के युवा हैं वे आधुनिक तकनीक से थक गए हैं उन्हें नया और सुकून भरा ठिकाना चाहिए। हमें इसके लिए काम करना है। गांधीवादी संस्थाओं को किस दिशा में सोचने की जरूरत है। हम उन्हें उदास जिंदगी का पैगाम नहीं दे सकते।

मौके पर पंकज मिश्रा,अरविंद अंजुम,शुभा प्रेम,संतोष द्विवेदी, उमेश चौबे नीरा देवी, राकेश कुमार, रमेश यादव, कमला प्रसाद सहित कवि,लेखक और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

फोटो

Vikash Agrahari

विकास अग्रहरी सोनभद्र म्योरपुर निवासी है। कम समय मे विकास अग्रहरी आज जिले की पत्रकारिता मे एक जाना पहचाना नाम है।

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