फ्लैशबैक अंशु राय हत्याकांड गवाह उसके पिता की हत्या की कोशिश मे 3 शूटर को प्रदीप सिंह चंदेल की टीम ने गिरफ्तार किया था
सोनभद्र फ्लैशबैक अंशु राय हत्याकांड गवाह उसके पिता की हत्या की कोशिश मे 3 शूटर को प्रदीप सिंह चंदेल की टीम ने गिरफ्तार किया था।

उस समय मुख्य गवाह और वादी अंशु राय के पिता ओम प्रकाश राय के हत्या की साजिश रचा गया था। उस समय के एसपी सुभाष चंद्र दूबे के नेतृत्व मे उस समय के एसओजी प्रभारी प्रदीप सिंह चंदेल और शिवानंद मिश्रा ने घेराबंदी करके मृतक के पिता और गवाह ओम प्रकाश राय को बचाया था। गोली मारने आये शूटर और उसका साथ देने वाले आरोपी को प्रदीप सिंह चंदेल ने (वर्तमान दुद्धी क्षेत्राधिकारी) गिरफ्तार किया था।
सपा नेता अंशु राय को मौत के घाट उतारने के बाद उनके पिता अधिवक्ता ओम प्रकाश राय की हत्या करने आए भाड़े के तीन शूटर को 2012 मे रेलवे क्रासिंग के पास मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया था। उस समय के एसओजी रहे प्रभारी प्रदीप सिंह चंदेल को सूचना मिली थी कि भाड़े के शूटर धुवास गांव में रुके हुये है और वह अधिवक्ता ओम प्रकाश राय की हत्या करने आये है। सूचना के बाद पुलिस सक्रिय हो गई थी। एसओजी प्रभारी प्रदीप सिंह चंदेल अपनी टीम के साथ कोन थानाध्यक्ष शिवानंद मिश्रा, एसएसआई जेपी द्विवेदी ने रात में ही राबर्ट्सगंज रेलवे क्रासिंग के पास घेरेबंदी किया तो तीनो फायर करने लगे लेकिन पुलिस की घेराबंदी के कारण वह दबोच लिया गया था।
प्रदीप सिंह चंदेल ने बताया कि उस समय आजमगढ़ जहानागंज थाना क्षेत्र के बदनपुर गांव निवासी सिद्धनाथ उर्फ आशीष यादव , सुल्तानपुर जनपद के दोस्तपुर थाना क्षेत्र के गोरई गांव निवासी रामसागर उर्फ बजरंग बली व वाराणसी जनपद के चौबेपुर थाना क्षेत्र के टेकुरी गांव निवासी अखिलेश कुमार सिंह उर्फ बबलू को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से 32 बोर पिस्टल, 32 बोर रिवाल्वर व 315 बोर दो नाली कंट्टा बरामद हुआ था।
अंशु राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी सूरज सिंह ने ओम प्रकाश राय की हत्या की सुपारी दिया था। सूरज उस समय मिर्जापुर जेल मे था। सूरज से जेल में रहे चुके जौनपुर के 10 हजार के इनामी विनोद यादव से मुलाकात हुआ था। विनोद ने ही इन शूटरो से सूरज से जेल से ही बात कराया था। सूरज का कहना था कि वकील ओम प्रकाश राय दबंग किस्म का व्यक्ति है और वह अपने पुत्र अंशु राय हत्याकांड का गवाह है। यदि ओम प्रकाश राय को रास्ते से हटा दिया जाए तो वह मुकदमे में बरी हो जायेंगे। उस समय के एडीजी जोन ने शूटर को पकड़ने वाली टीम को 15 हजार इनाम दिया था।



