सोन संगम के तरफ से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत रत्न ,पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाया गया

सोनभद्र (अरविंद गुप्ता)
सोन संगम के तरफ से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत रत्न ,पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई गई।
गांधी एवं शास्त्री की जयंती के अवसर पर किया गया संगोष्ठी एवं काव्य संध्या का भव्य आयोजन।
साहित्यिक सामाजिक संस्था सुनसंगम शक्तिनगर की ओर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर संगोष्ठी एवं काव्य संध्या का आयोजन किया गया सर्वप्रथम बापू एवं शास्त्री के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन पुष्पांजलि एवं बाल्यावस्था के उपरांत उपरांत अतिथियों का स्वागत दो मानिकचंद पांडे की ओर से

किया गया इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी कैंपस शक्तिनगर के प्रभारी, डॉ प्रदीप कुमार यादव रहे । विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री वी के सारस्वत,अपर महाप्रबंधक M G R शक्ति नगर रहे ,तथा दूसरे विशिष्ट अतिथि के रूप में, श्री ए क सिंह, अपर महाप्रबंधक आई टी एनटीपीसी शक्ति नगर रहे ।कार्यक्रम की अध्यक्षता , विनय कुमार अवस्थी अपर महाप्रबंधक, तकनीकी सेवाएं एनटीपीसी शक्ति नगर के द्वारा किया गया ।
डॉ बृजेंद्र शुक्ला तथा रविंद्र मिश्रा के द्वारा ,रघुपति राघव राजा राम तथा नरसी मेहता द्वारा रचित गांधी जी का प्रिय भजन, वैष्णो जन तो तेने कहिए, पीर पराई जाड़े रे। पर दुखी उपकार करें जो मान अभिमान न माने रे , से हुई।
संगोष्ठी का श्री गणेश करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, एनटीपीसी कैंपस शक्तिनगर के प्रभारी एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, डॉ प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि ,आधुनिक परिवेश में महात्मा गांधी का महत्व बदल चुका है। कहीं ना कहीं उनके विचार एवं उनके आदर्श, व्यवहार रूप में देखे जा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, ईमानदारी तथा देश के प्रति किए गए कार्यों की विस्तार रूप से अपने विचार को रखा । विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री बी के सारस्वत ने ,गांधी जी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शख्सियत के रूप में चित्रित किया।दूसरे विशिष्ट अतिथि,श्री ए क सिंह ने महात्मा गांधी की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि आज भी गांधी की के द्वारा बड़ी से बड़ी शक्तियों को पराजित किया जा रहा है इसका उदाहरण इस प्रकार देखा जा सकता है की गांधी के ऊपर तथा गांधी गिरी को लेकर तमाम फिल्में बनाई गई जो आज के युग में अपना प्रभाव छोड़ती हैं। मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी शक्तिनगर समाजशास्त्र के, वरिष्ठ अध्यापक, डॉ विनोद कुमार पांडेय ने ,अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, गांधी जी अपने समय से ज्यादा, इस समय प्रासंगिक है । निर्बल की ताकत है। गांधीजी आज भी लोगों के बीच में देखे जाते हैं ।अवधूत भगवान राम पीजी कॉलेज अनपरा हिंदी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका, डॉ अर्चना मिश्रा ने, गांधी जी को महिलाओं का संरक्षक बताया। उनका कहना था कि ,महिला वर्ग के प्रति जो गाँधी की भाव दृष्टि रही है। वह आज भी विशेष रूप से देखने को मिलती है। डॉ छोटेलाल प्रसाद ने, महात्मा गांधी द्वारा संपादित पत्र पत्रिकाओं की विशेष रूप से चर्चा की । जिसमें बताया कि ,गांधी जी ने जो उस समय पत्रिकाएं निकाली, वह भारत की ताकत के रूप में दुनिया में देखी गई। अन्य वक्ताओं में शरद सिंह, अरविंद कुमार सराफ,मनोरमा, अनीता, इत्यादि ने अपने विचार प्रस्तुत किया ।
काव्य गोष्ठी का श्री गणेश कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री विनय कुमार अवस्थी जी की इन पंक्तियों से हुई
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु ,लोह पुरुष सरदार ।
सावरकर सुभाष असल ,आजादी हकदार।
सत्य अहिंसा प्रेम था ,गांधी का उपदेश।
आजादी पाने दिया सत्याग्रह संदेश ।
नए रचनाकार के रूप में पधारी सु श्री प्रिया गुप्ता ने अपनी पंक्तियां कुछ इस प्रकार लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया
गुजरते लम्हों में सादियां तलाश करती हूं,
प्यास इतनी है कि नदिया तलाश करती हूं ।
लोग बताते हैं यहां खूबियां अपनी,
मैं खुद में ही कमियां तलाश करती हूं ।
श्रीमती विजयलक्ष्मी पटेल ने अपनी बात कविता के माध्यम से कुछ इस अंदाज में बया किया
बेटी कोई वस्तु नहीं जो ,तार तार तुम हो करते हो।
बेटी कोई वस्तु नहीं जो बार-बार तुम दहते हो ।
श्री बृजेश कुमार पांडेय, ने गांधी जी को केंद्र में रखकर अपनी पंक्तियां कुछ इस तरह पेश की
सत्य अहिंसा को अपनाया ,प्रेम और सौहार्द को।
मानवता के सहजीवी बन स्वीकारा परमार्थ को।
बायो वृद्धि कवि वयोविध कवि श्री बद्री नारायण प्रसाद ने गांधी जी को अपनी भावभीनी पंक्ति को इस प्रकार प्रस्तुत किया
सत्य अहिंसा को अपनाओ इनसे होती सदा भलाई।
इनके दाम पर गांधी जी ने अंग्रेजों की फौज भगायी ।
सोनभद्र के जाने-माने शायर, बहर बनारसी ने ,अपनी गजल को इस अंदाज मे लोगों के सामने पेश किया
तुम्हारे जैसा मेरा खानदान थोड़ी है ।
पढ़ा लिखा है यह भेड़िया धसान थोड़ी है ।
डॉ विजेंद्र शुक्ला ने अपनी कविता में कहा कि
आइए हम सब मिल अनुबंध ये करें
सोमनस्य से वैमनसेय की खाइया भरे।
अपने हास्य व्यंग प्रस्तुत करते हुए प्रज्ञा चक्षु ,श्री रविंद्र मिश्रा ने अपनी कविता कुछ इस प्रकार लोगों के सामने रखा ,शारदे मां शारदे ,मुझे मोटर बंगला कार दे।
बयोवृद्ध कवि कृपा शंकर माहिर मिर्जापुरी जी ने कुछ इस प्रकार अपने भाव व्यक्त किया
गोपी के मयखाने से गया है अभी-अभी ।
कमबख्त पीता है रोज और कहता है कभी-कभी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ मानिक चंद पांडेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ अनिल कुमार दुबे के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में मुकेश रेल, ओमप्रकाश गुप्ता ,उदय नारायण पांडेय, अच्छे लाल ,पवन देव, पप्पू चाय कोहिनूर के साथ-साथ अन्य लोग उपस्थित रहे।



