सबे कद्र पर खत्म तरावीह के बाद सजी दुरुदो सलाम की महफ़िल

जामा मस्जिद में खत्म हुई रमजान की विशेष नमाज तरावीह
दुद्धी, सोनभद्र (मु.शमीम अंसारी)। रमजान शरीफ के मुकद्दस माह में अदा की जाने वाली तरावीह की खास नमाज दुद्धी जामा मस्जिद में मंगलवार की रात मुकम्मल हो गई। खत्म तरावीह के मौके पर नगर के फैजाने रजा कमेटी के तत्वाधान में नातख़्वानी व दुरुदो सलाम की महफिल मुनक़्क़ीद की गई। फैजाने रज़ा कमेटी के सदर रिजवानुद्दीन ने “ए खत्मे रसूल मक्की मदनी कौनन में तुमसे कोई नहीं, ए नूरे मुजस्सम तेरे सिवा महबूब खुदा का कोई नहीं, तथा “ए आसमां कहाँ वो तेरे हिलाल में है, जो बात मुस्तफा के प्यारे बेलाल में है, जैसी दो नात पेश कर मस्जिद में मौजूद एक-एक शख्स को इस्लामी रंग में सराबोर कर दिया। नारे तकबीर अल्लाह हू अकबर, नारे रिसालत या रसूल अल्लाह जैसे इस्लामी नारों के बीच यूनुस खान ने “सुबह तैबा में हुई बंटता है बाड़ा नूर का, तौहीद ने “जहाँ बानी अता कर दे भरी जन्नत हिबा कर दे, तथा मोबिन और पट्टू शाह ने कलामे आला हजरत पेश किया। कार्यक्रम में तरावीह की नमाज अदा कराने वाले हाफिज अब्दुल रज्जाक, मोअज्जिम ऐनुलहक व एतकाफ पर बैठे अशफ़ाक़ गोल्डन को तोहफा देकर उनकी हौसला अफजाई व खैर मकदम किया गया। अंत में हाफिज अब्दुल रज्जाक साहब ने अलविदा पर बेहतरीन नात पेश करते हुए उनकी दुआख़्वानी व दुरुदो सलाम के साथ महफिल का समापन हुआ। महफिले मिलाद की निजामत (संचालन) हाफिज रेजाउल मुस्तफा ने किया। इस अवसर पर अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमीन कमेटी व मकतब जब्बरिया कमेटी के ओहदेदारों सहित अन्य संभ्रांतजनो का फैजाने रज़ा कमेटी ने सम्मानित किया। इस अवसर पर हाफिज तौहीद, सदर कल्लन खान, मकतब जब्बरिया प्रबंधक हासिम अंसारी, मन्नू खान, कलीमुल्लाह खान, हाफिज जहांगीर, मौ. कासिम, आदिल खान, लाला बाबू, मुर्तजा भाई, अमान खान, लाडले, मेराज अहमद आदि सहित फैजाने रजा कमेटी के समस्त सदस्य उपस्थित थे।



