इबादत की नियत से एतकाफ पर 10 दिनों के लिए मस्जिद में कैद हुआ रोजेदार

रमजान की खास इबादतों में शुमार है एतकाफ का सिलसिला
समाज के सलामती के लिए रमजान के आखिरी दस दिन मस्जिद में बैठते हैं एतकाफ पर
ईद के चांद का दीदार करने के बाद ही मस्जिद से निकलेगा बाहर
दुद्धी, सोनभद्र (मु.शमीम अंसारी)। आपसी सौहार्द, समाज की तरक्की व सलामती के लिए कस्बे का एक परहेजगार अकीदतमंद युवक बुधवार की शाम स्थानीय जामा मस्जिद में एतकाफ पर बैठ गया। दुनियाबी चीजों से बेखबर और खुदा की इबादत में पूर्णरूपेण 10 दिनों तक लीन रहने वाला यह सख्श अब ईद के पूर्व संध्या पर चांद का दीदार करने के बाद ही मस्जिद से बाहर निकलेगा। इस दौरान खुदा की बारगाह में दिन रात इबादत के बाद रो-रोकर सामाजिक उत्थान की दुआ मांगेंगा। स्थानीय जामा मस्जिद के पेशिमाम हाफिज सईद अनवर ने बताया कि रमजान की एक खास इबादत एतकाफ है। गांव या कस्बे में किसी एक नमाजी परहेजगार को रमजान की 20वीं तारीख को मगरीब (सूर्यास्त) से पहले-पहले चांद रात तक के लिए मस्जिद में 10 दिनों के लिए अस्थाई रूप से प्रवेश कर जाना एतकाफ कहलाता है। यह सुन्नते मोअक्केदा है। इसकी शुरुआत हुजूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के जमाने से हुई। हुजूर खुद पहले, दूसरे व तीसरे असरे तक एतकाफ पर बैठते थे। सरकार ने तीसरे असरे में लोगों को भी एतकाफ पर बैठने का हुक्म दिया। आखिरी यानी तीसरे असरे का एतकाफ 21वीं शब (रात) से शुरू होता है, जो चांद रात तक अनवरत चलता रहता है। स्थानीय जामा मस्जिद में इन दिनों तरावीह की विशेष नमाज अदा करवा रहे हाफिज अब्दुल रज़्ज़ाक साहब बताते हैं कि एतकाफ सुन्नते मोअक्केदा किफ़ाया है। इसका मतलब कि किसी भी गांव, मोहल्ले या कस्बे का एक नमाजी परहेजगार इंसान बतौर पूरे समाज का प्रतिनिधि एतकाफ पर बैठता है तो पूरे समाज का एतकाफ हो जाएगा। एतकाफ के जरिए शबे कद्र की तलाश की जाती है। शबे कद्र वह मुबारक रात है जिसमें कुरान नाजिल हुआ है। हाफिज साहब ने यह भी बताया कि एतकाफ का मतलब धरना देना है। खुदा के दरबार में अपनी समाज के सलामती, उसकी तरक्की तथा समाज में रहने वाले लोगों के गुनाहों को माफ कर उन्हें नेक रास्ते पर चलाने जैसी दुआओं को लेकर खुदा को राजी करने हेतु धरने पर वो इंसान बैठ जाता है। इस जायज मांगों के जरिए अल्लाह की रजामंदी हेतु एतकाफ के दौरान वह कुरान शरीफ की तिलावत, पांचों वक्त की नमाज, रोजा तरावीह, तहज्जूद की बेहद कठिन नमाज को अपना दिनचर्या बना लेता है। एतकाफ पर इस साल बैठने वाले कस्बे के अशफाक आलम उर्फ गोल्डन का शुक्रिया अदा करते हुए लोगों ने अकीदतमंदों से समाज की सलामती, आपसी भाईचारा, क्षेत्र सहित मुल्क की तरक्की जैसे दुवाओं की अपील की। बुधवार की शाम एतकाफ पर बैठने वाले इस अकीदतमंद के लिए लोगों ने नारे तकबीर अल्लाहो अकबर व नारे रिसालत या रसूलल्लाह जैसे इस्लामी नारों के बीच मस्जिद में प्रवेश कराया।



