राम वनवास प्रसंग सुन नम हुईं आंखें, भरत के त्याग ने किया श्रद्धालुओं को भावविभोर

म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीराम कथा के क्रम में शनिवार को कथा के छठवें दिन श्री गोकुल धाम से पधारे कथावाचक पंडित दिलीप कृष्ण भारद्वाज महाराज के श्रीमुख से भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक वाचन किया गया। वनवास की घोषणा का प्रसंग प्रारंभ होते ही पूरा कथा पंडाल करुणा, भक्ति और संवेदना के भाव में डूब गया।
कथावाचक ने माता कौशल्या की ममता से भरी पीड़ा, पिता दशरथ की असहनीय व्यथा, माता सीता का पतिव्रत धर्म तथा लक्ष्मण के अटूट भ्रातृ प्रेम का हृदयस्पर्शी वर्णन किया। अयोध्या त्याग का दृश्य सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं और कई

श्रद्धालु भावुक हो उठे। पंडाल में “जय श्रीराम” के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बन गया।
राम वनवास प्रसंग के साथ कथावाचक ने भरत के चरित्र को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भरत का त्याग, समर्पण और आदर्श भ्रातृ प्रेम भारतीय संस्कृति का अनुपम उदाहरण है। भरत ने राजसत्ता और वैभव को ठुकराते हुए भगवान श्रीराम को ही अयोध्या का सच्चा राजा माना।
भरत द्वारा श्रीराम की चरण पादुका को सिंहासन पर विराजमान कर अयोध्या का संचालन करने के संकल्प का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरे पंडाल में जय श्रीराम के गगनभेदी जयकारे गूंज उठे।

कथावाचक ने कहा कि भरत का चरित्र आज के समाज के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सिखाता है कि स्वार्थ और सत्ता से ऊपर उठकर कर्तव्य, प्रेम और मर्यादा का पालन ही सच्चा धर्म है। कथा के दौरान श्रोता पूरी तरह भक्तिरस में डूबे रहे।कार्यक्रम के अंत में विधिवत आरती उतारी गई तथा प्रसाद का वितरण किया गया।इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष सोना बच्चा अग्रहरि, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री जीत सिंह खरवार,बीडीओ दिनेश मिश्रा, ग्राम प्रधान संगीता जायसवाल, आशीष अग्रहरि (बिट्टू), गणेश जायसवाल,शशांक अग्रहरि, सुजीत अग्रहरि, अमित रावत, दीपक योगी,अजय अग्रहरि,सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।



