सोनभद्र के स्कूलों में डेटा आधारित शिक्षा सुधार योजना में मिले उत्साहजनक परिणाम

सोनभद्र (विकास द्विवेदी) परिषदीय विद्यालयों में डेटा आधारित प्रशासनिक परफॉरमेंस सुधार हेतु जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनन्द पाण्डेय द्वारा सितम्बर 2025 में जनपद में शुरू किया गया 12 -सङ्केतक आधारित शिक्षा नवाचार का पायलट चरण पूरा हो गया है। अभियान अंतर्गत स्कूलों में डेटा सटीकता सुनिश्चित करना, समय-सारणी और शिक्षक-नियोजन को मज़बूत करना, ट्रांज़िशन रेट बढ़ाना तथा डिजिटल शिक्षण उपकरणों के उपयोग को तेज़ करना शामिल था। सकारात्मक प्रतिस्पर्धा में इंस्पायर मानक अवार्ड हेतु २८०४(83.5%) छात्रों ने अपने वैज्ञानिक विचार प्रेषित किए जो जनपद से अब तक की प्रेषित सर्वाधिक प्रविष्टि है। भारत सरकार द्वारा आयोजित स्वच्छ हरित विद्यालय मूल्यांकन हेतु 99.6% विद्यालयों द्वारा स्वमूल्यांकन किया गया।
पिछले एक महीने में स्कूलों का निरीक्षण, प्रोफाइल व नामांकन की पुष्टि और पोर्टल-अपडेट का व्यापक कार्य संपन्न किया। इस दौरान कोन ब्लॉक ने सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर कई संकेतकों पर मॉडल-प्रैक्टिस प्रस्तुत किया , चतरा ब्लॉक ने अनुशासन व नामांकन सटीकता में उत्कृष्ट सुधार दर्ज किया तथा राबर्ट्सगंज ब्लॉक ने डेटा-गुणवत्ता और शिक्षण-घंटों के प्रभावी उपयोग में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनन्द पाण्डेय ने बताया कि यदि डाटा आधारित विश्लेषण और योजना क्रियान्वयन किया जाए तो क्रमिक रूप में विकास प्रदर्शित होता है और उसमें आने वाली बाधाओं की पहचान करना आसान हो जाता है। सभी खंड शिक्षा अधिकारी, जिला सह समन्वयक , एसआरजी , एआरपी, संकुल शिक्षक एवं विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों को इस पायलट प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए बधाई।
अभियान के दौरान प्रत्येक स्कूल की छात्र व शिक्षक प्रोफाइल को मानकीकृत तरीके से सत्यापित और लॉक किया गया, जिससे डीबीटी के सत्यापन में त्रुटियाँ कम हुईं और भुगतान प्रक्रिया में तेजी आई। समेकित टाइमटेबल ऑडिट से शिक्षण घंटों का सही आवंटन सुनिश्चित हुआ, जिससे विशेषकर चतरा और राबर्ट्सगंज ब्लॉकों में शिक्षण अनुशासन में सुधार देखा गया।
कक्षा 5–6 तथा 8–9 के ट्रांज़िशन पर केंद्रित अभिभावक-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके कारण कुछ पायलट ब्लॉकों में शैक्षिक स्थानांतरण दरों में उल्लेखनीय सुधार हुआ। यूडायस प्लस पर छात्र नामांकन एवं ट्रांज़िशन को बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने के लिए विद्यालयों को दिन-प्रतिदिन उनकी प्रगति से अवगत कराया गया। ड्रॉपबॉक्स में दर्ज छात्रों का विवरण उपलब्ध कराया गया, ताकि उन्हें चिन्हित करते हुए पुनः विद्यालय में उम्र के अनुसार नामांकित किया जा सके। इस प्रक्रिया ने नामांकन की सटीकता और ट्रांज़िशन दरों को सुधारने में अहम भूमिका निभाई।
निपुण लक्ष्य ऐप के री-ट्रेनिंग सत्रों व तकनीकी सहायता के कारण कोन एवं नगवा में डिजिटल शिक्षण गतिविधियों का प्रयोग बढ़ा, जबकि चोपन और बभनी में अभी और प्रशिक्षण आवश्यक है। विशेष रूप से, नो नेटवर्क जोन में स्थित विद्यालयों को बिना नेटवर्क के निपुण लक्ष्य प्लस ऐप से मूल्यांकन करने की विधि समझाए जाने के बाद इसके उपयोग में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई। 15 सितम्बर तक जहाँ इस ऐप से मात्र 4% छात्रों का मूल्यांकन हुआ था, वहीं माह के अंत तक यह बढ़कर 60% तक पहुँच गया और जिले ने प्रदेश में 12वाँ स्थान हासिल किया। बच्चों की नियमित उपस्थिति सुधारने हेतु पोषण-लिंकेज और घर-आधारित फॉलो-अप की रणनीतियाँ लागू की गईं।
अभियान ने संकुल-स्तरीय डीसीएफ समेकन की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया जिससे ब्लॉक-स्तरीय रिपोर्टिंग में सुसंगतता आई और जिले स्तर पर निर्णय लेना सरल हुआ। साथ ही नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत निरक्षर लोगों को रजिस्टर करने में घोरावल और म्योरपुर ने अच्छे परिणाम दिए, जबकि करमा और दुद्धी में जागरूकता तथा पहुँच बढ़ाने की आवश्यकता बनी हुई है। मार्च 2026 में जनपद से पचीस हजार निरक्षरों को साक्षर करने का लक्ष्य है। डेटा-क्वालिटी ऑडिट ने कुछ स्थानों पर रिकॉर्ड विसंगतियाँ उजागर कीं जिनका त्वरित निराकरण किया जा रहा है।
खंड शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि यह नवाचार शिक्षा व्यवस्था को डेटा-प्रेरित और फील्ड-समर्थित दिशा में ले गया है तथा निरंतर निगरानी और स्थानीय-स्तरीय हस्तक्षेप से दीर्घकालिक सुधार सुनिश्चित किए जा सकेंगे। प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं और आगे के कार्यों में अधिगम स्तर और उपस्थिति की गुणवत्ता सुधार हेतु समुदाय-भागीदारी, तकनीकी सहायता और सतत प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।



