पूंछ में आग लगते ही हनुमान जी ने जलाई लंका

म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
म्योरपुर कस्बा मे चल रही श्रीराम लीला मंचन के नौवे दिन का प्रसंग लंका पर चाढ़ाई करने के साथ शुरू हुआ । सीता माता का पता लगाने हनुमान जी लंका पूरी को जाते हैँ लंका पहुंच अशोक वाटिका मे सीता जी से हनुमान जी मिल बताते हैँ मै श्रीराम का दूत हनुमान हू सीता माता से आज्ञा ले अशोक वाटिका मे लगे मीठे फलो को तोड़ने लगते हैँ इसी दौरान अच्छय कुमार हनुमान जी को पहुंच वाटिका उजड़ने से रोकता हैँ लेकिन हनुमान जी नहीं मानते दोनों मे युद्ध होता हैँ हनुमान जी के एक प्रहार से अच्छय कुमार बीर गति को प्राप्त करता हैँ पुत्र कि मौत कि खबर रावण को होते ही क्रोधित रावण मेघनाथ को अशोक वाटिका मे भेजता हैँ मेघनाथ द्वारा ब्रम्ह फास मे बांध कर हनुमान जी को रावण के पास लाया जाता हैँ
रावण अपने अहंकार में डूबा हुआ था। वह हनुमान जी को दंड के रूप में अपने सैनिकों कहता है की इस वानर कि पूँछ मे आग लगा दे और इसे लंका में घुमाओ ताकि लंका के बच्चे इसे देख कर हंस सके यह सुन हनुमान जी क्रोधित हो जाते हैँ और पूरा सोने कि लंका नगरी को जला देने के प्रभु श्री राम के पास आकर बताते हैँ श्री राम द्वारा लंका पर चाढ़ाई के लिए नल नील को पत्थल से पुल बनाने का आदेश दिया जाता हैँ नल नील द्वारा फेके गये पत्थर पानी मे तैरने लगे जिनपर सौ योजन का पुल बन कर तैयार हो जाता लंका पर चड़ाई कि खबर गुप चर सर सुन रावण ब्याकुल हो जाता हैँ और इंद्र जीत को युद्ध मे भेजता हैँ जहाँ लक्षमन और मेघनाथ का युद्ध होता हैँ युद्ध मे मेघनाथ द्वारा शक्ति बाड़ लक्षमन जी पर छोड़ा जाता हैँ जिससे वे मुरक्षित हो जमीन पर गिर जाते हैँ लीला देख दर्शक भाव विभोर हो जाते हैँ इस दौरान कमेटी के अध्यक्ष मोनू जायसवाल,कोषाध्यक्ष सुनील अग्रहरी (गोटया जी)महा मंत्री शुभम अग्रहरी उपाध्यक्ष मनदीप, (ब्यास आशीष अग्रहरी)राम लीला का मीडिया प्रभारी पंकज सिंह,अजय अग्रहरी.जय सोनी श्यामू, रामु, अंकित अग्रहरी, प्रकाश अग्रहरी, ह्रदय अग्रहरी, प्रीतम सोनी, आनंद तिवारी वालेंटियर प्रमुख अलोक अग्रहरी अपने टीम के साथ एव तमाम कमेटी एव मंडली के कार्यकर्ता मौजूद रहे



