एक क्षमता निर्माण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित
सोनभद्र (विकास द्विवेदी) राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत एक क्षमता निर्माण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का आयोजन एएसएमसी में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. सूर्यकांत त्रिपाठी रहे। जो नार्थ जोन क्षेत्रीय टास्क फोर्स (एनटीईपी) के अध्यक्ष, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सोसाइटी (2025) के संस्थापक अध्यक्ष तथा ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केयर हेतु उत्कृष्टता केंद्र के संस्थापक प्रभारी हैं।
प्रो. त्रिपाठी, जो कि किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के श्वसन रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय यूएसए द्वारा विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल किए गए हैं तथा नई शिक्षा नीति 2023 की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं।
बैठक में प्राचार्य डॉ एसके सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी, सीएमएस, एमएस, डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि तथा एएसएमसी सोनभद्र के सभी विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे। चर्चा के दौरान प्रो. त्रिपाठी ने क्षय रोग की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला गया।कृविश्व के प्रत्येक चौथे टीबी रोगी का संबंध भारत से है तथा भारत के प्रत्येक पाँचवें टीबी रोगी का संबंध उत्तर प्रदेश से है।डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2024 में भारत की टीबी संक्रमण एवं मृत्यु दर में कमी के लिए सराहना की गई। प्रो. त्रिपाठी के मुख्य संदेश किसी टीबी रोगी के संपर्क में आने के बाद सक्रिय टीबी विकसित होने की संभावना केवल 3: है, सभी एचआईवी एवं मधुमेह रोगियों की टीबी जाँच अनिवार्य है तथा इसके विपरीत भी, कम उम्र में विवाह एवं लगातार शीघ्र गर्भधारण से टीबी का खतरा बढ़ सकता है, एएसएमसी, सोनभद्र को अलग निक्शय आईडी प्रदान की जाएगी। शासन द्वारा प्रत्येक पंजीकृत रोगी के लिए निःशुल्क जाँच, निःशुल्क उपचार एवं एक हजार रूपये प्रतिमाह पोषण सहायता की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने सभी निक्शय मित्रों के लिए पाँच कार्यों का उल्लेख किया कृजागरूकता, शिक्षण, प्रशिक्षण, पक्षसमर्थन (एडवोकेसी) एवं अनुसंधानकृताकि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। एनटीईपी हेतु एक मेडिकल कॉलेज कोर कमेटी का गठन भी किया गया, जो शासन के साथ समन्वय स्थापित कर उन्मूलन लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देगी। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ.एसके सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।



