प्रदीप सिंह चंदेल ने गरीब बच्चों में जाकर मिठाइयां बाट मनाई दीपावली

सोनभद्र खाकी ने गरीब बच्चों में जाकर मिठाइयां बाट मनाई दीपावली। अक्सर हमारे दिलो दिमाग में खाकी का कुछ गलत ही चित्रण होता है। किसी के घर पुलिस पहुंच जाये तो घरवाले ही नहीं पूरा मुहल्ला सहम जाता है। और कहते हैं के “का हो गइल भइया के पुलिस आ गइल बा”। रूह काप उठती है लोगो की खाकी के नाम से। कही ये वर्दीधारी गरीबो के दरवाजे पहुंच जायें तो वो थर थर कांपने लगते हैं। सांस अंटक जाती है। मगर इससे इतर खाकी का एक अलहदा तस्वीर सामने आया है। जी हाँ सोनभद्र में खाकी का एक अलग ही रूप सामने आया है। गरीब बच्चो का मन भी दीवाली में पटाखे जलाकर मिठाई खाने का होता है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण ऐसे घरों के बच्चे अपना मन मार कर रह जाते है।

अब से पहले आसमान में छूटने वाले पटाखो को देखकर ही गरीब बच्चे खुश हो जाते थे। दुद्धी क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह चंदेल ने सराहनीय पहल की है और उन्होंने प्रकाश पर्व दीपावली को अलग अंदाज में मनाई। उन्होंने मलीन बस्ती में जाकर आस पास के गरीब बच्चों को खिलौने, पटाखे, मिठाई व मोमबत्ती आदि वितरित किया। खाकी को अपने बीच पाकर गरीबों व अनाथों के चेहरे खुशी से खिल उठे। इस सराहनीय कार्य से खाकी पहली बार बड़ी परंपरा की नींव डालती नजर आई। आवश्यकता है तो इस कड़ी को बरकरार रखने की।
इस दौरान प्रदीप सिंह चंदेल ने बताया कि लोगों में खाकी वर्दी के वहम को मिटाने का मैंने एक छोटा सा प्रयास किया है। पुलिस और आम जनता के बीच मतभेद नही होना चाहिये। जनता की ही सहायता के लिए पुलिस सजग प्रहरी बनी रहती है। सामंजस्य अगर बना रहे तो आपराधिक घटनाएं नहीं होंगी। बच्चो के खिलखिलाते चेहरे देख उन्होंने देश का भविष्य बताया।



