सोन संगम की तरफ से मतदान हेतु विचार संगोष्ठी तथा काव्य संध्या का आयोजन किया गया
शक्तिनगर/सोनभद्र सोन संगम की तरफ से मतदान हेतु विचार संगोष्ठी तथा काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सीधी मध्य प्रदेश से पधारे श्री हरिहर प्रसाद विश्वकर्मा सुमन जी रहे विशिष्ट अतिथि के रूप में जयप्रकाश पासवान असिस्टेंट प्रोफेसर कंप्यूटर राजीव गांधी डिग्री कॉलेज बैद्धन तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता विनय कुमार अवस्थी अपर महाप्रबंधक तकनीकी सेवाएं एनटीपीसी शक्ति नगर ने किया।अतिथियों का परिचय एवं स्वागत करते हुए विजय कुमार दुबे ने कहा कि ,आज का दिन कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। जहां एक महर्षि नारद जी की जयंती है वहीं दूसरी जो हमारे देश में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए मतदान चल रहा है। निर्वाचन हो रहा है। ऐसे में हम सभी का परम कर्तव्य है कि बिना किसी संकोच के , प्रत्येक परिस्थिति में मतदान करें। अपने मताधिकार का प्रयोग करें मताधिकार का प्रयोग करना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है ।दूसरे शब्दों में कहें तो” वोट देना गर्व है !जनता का यह पर्व है। “इसी क्रम मे डा मानिक चंद पांडेय ने कहा कि, मतदान करने से हमें नैतिक ताकत प्राप्त होती है। हमारी देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास भी होता है। इसलिए हम सभी को मतदान करना चाहिए ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विनय कुमार अवस्थी ने कहा कि, हम सभी को सारे काम छोड़कर के पहले मतदान करना चाहिए क्योंकि मतदान करने से हम एक अपनी मजबूत सरकार का निर्माण करते हैं। इसलिए मतदान को परम कर्तव्य समझना चाहिए ।
काव्य संध्या का आगाज करते हुए मुख्य अतिथि हरिहर प्रसाद विश्वकर्मा ने अपनी पंक्तियां कुछ भगवान राम को इस प्रकार समर्पित कियासजा दो अवध गुलशन सा ,हमारे राम आए हैं।
पीढिया सचमुच कई बीती ,बड़ी मुश्किल उठाएं हैं। । नावोदित रचना धर्मी सुश्री प्रिया गुप्ता ने अपनी रचना कुछ इस अंदाज में बयां किया
खुद को इतना भी मत बचाया का कर
बारिशे आए तो भीग जाया कर
यहां कोई तुम्हें चुप करने वाला नहीं है
इसलिए बेवजह मुस्कुराया कर ।
सोनभद्र के वरिष्ठ कवि कृपा शंकर , माहिर मिर्जापुर ने अपनी कविता कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया
जो बात पहले थी वह अब कहां
पहले जैसा कुछ भी ना लगता यहां
देश को कुछ लोग खुला चर रहे है, जड़े देश की खोखला कर रहे हैं
जाने माने गजल का बहर बनारसी ने अपनी कता को इस अंदाज में पेश– ए खिदमत किया
कभी हम भजन में कभी हम अजा में रहते हैं
हमें पसंद है दोनों मका में रहते हैं
ये और बात है टूटे मका में रहते हैं
मगर ये फख है हिंदुस्तान में रहते हैं।
काव्य संध्या का संचालन कर रही श्रीमती विजयलक्ष्मी पटेल ने अपनी कविता लोगों के सामने कुछ इस तरह पेश किया
प्रगति मार्ग की राह पर ,हम करें सृष्टि का नाश।
धरती मेरी दहक रही ,हम मानव बने उसका अभिशाप।
अंतिम कवि के रूप में बद्री प्रसाद ने अपनी कविता इस प्रकार लोगों को सुनाया
जिंदगी एक मुलाकात है ,मिलकर जियो
जिंदगी कभी आंसू भी है ,बस इसे पीकर जियो
जिंदगी कभी गम भी है, सब रख कर जियो
जिंदगी आखिर जिंदगी है बस मुस्कुरा का जियो।इस कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डा मानिक चंद पांडेय ने किया । सीताराम अवधेश गुलाब सिंह, मुकेश रेल मनोरमा प्रशांत कुमार विश्वकर्मा डा रनवीर प्रताप सिंह डॉ दिनेश कुमार डा अपर्णा त्रिपाठी डा छोटेलाल प्रसाद डा मनोज गौतम डा अविनाश कुमार दुबे इत्यादि के साथ-साथ अन्य लोग उपस्थित रहे।




