दशको से दिव्यांग एशिया कप विजेता क्रिकेटर गुमनामी की जिंदगी जीने को विवश

सोनभद्र दशको से दिव्यांग एशिया कप विजेता क्रिकेटर गुमनामी की जिंदगी जीने को विवश। सोनभद्र के अनपरा क्षेत्र के रहने वाले अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ी लव वर्मा जो आज के दिन यानी 13 फरवरी 2015 को 5 देशों के दिव्यांग एशिया कप विजेता बने आज 11 वर्ष हो गए किंतु इस खिलाड़ी की सुध लेने वाला कोई नहीं है जबकि गुमनामी की ज़िंदगी जीने को विवश है । बता दें कि लव वर्मा जनपद सोनभद्र के एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ी जिन्होंने अब तक 14 अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया है जिसमें 2014 में श्रीलंका दौरे पर मैन ऑफ द सीरीज होते हुए विजेता बने थे, 4 से 13 फरवरी 2015 को 5 देशों के दिव्यांग एशिया कप चैंपियन बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी जिसमें भारत के अलावा अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, संबंध खराब होने के कारण पाकिस्तान शामिल नहीं रहा, इन देशों ने भाग लिया था । 2017 में बांग्लादेश दौरे पर ट्राई सीरीज में संयुक्त विजेता रहे, 2019 में नेपाल के खिलाफ भारत के कप्तान होते हुए 131 रनों से विजेता बनाया, 2021 में दुबई के शारजाह अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में दिव्यांग प्रीमियर लीग में मैन ऑफ द मैच होते हुए उपविजेता बने । इनके शानदार उपलब्धियों के लिए इन्हें 3 दिसम्बर 2021 विश्व दिव्यांग दिवस पर लखनऊ में दिव्यांग जनसशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी पुरूष वर्ग में राज्य पुरस्कार मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के करकमलों द्वारा दिया जा चुका है । 2022 में बांग्लादेश के साथ वनडे में उपविजेता, टी 20 में विजेता रहे, 2023 में नेपाल के साथ त्रिदिवसीय टेस्ट मैच में भारत को विजेता बनाने में प्रमुख भूमिका निभायी । इसके अलावा कई राष्ट्रीय मुकाबले में जीत दर्ज के साथ कई पुरस्कार दिव्यांग रत्न, दिव्यांग खेल रत्न, स्वर्ण भारत खेल रत्न, कुशीनगर गौरव सम्मान, प्रेरणा सम्मान, युवा भारत ट्रस्ट द्वारा खेल रत्न सम्मान, 2015 में जिलाधिकारी सोनभद्र द्वारा सम्मानित, एनसीएल द्वारा सम्मानित किया जा चुका है । इतनी उपलब्धियों के बावजूद भी लव वर्मा की कोई सुध लेने वाला नहीं है, लव वर्मा पिछले 4 वर्षों से मिट्टी की झोपड़ी में रहने को विवश है, खेल कोटे से रोजगार के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से लगातार 2 वर्ष मिले लेकिन वहाँ भी सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, कैबिनेट मंत्री, पूर्व मंत्रियों, राज्यमंत्री, सांसद, विधायक,जिलाधिकारी से गुहार लगा चुके हैं लेकिन इन 11 वर्षों में इन्हें आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला । लव वर्मा अनपरा में रहकर अनपरा कॉलोनी के सीआईएसएफ मैदान में छोटे बच्चों को क्रिकेट प्रशिक्षण देकर बड़ी बमुश्किल गुजारा करते हैं, यहां पर कई जनपदों, राज्यों के मध्य समय समय पर प्रतियोगिता कराकर यहां की प्रतिभाओं को निखारने का कार्य भी करते है, अब तक 250 से अधिक मैचों के आयोजन कराकर एक मंच देने का प्रयास किया है इन सबके बावजूद भी अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेटर की सुध लेने वाला कोई जनप्रतिनिधि नहीं है ।
ओबरा विधानसभा के विधायक एवं सरकार में समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव सिंह गोंड से कई बार रोजगार सम्बन्ध में पत्रक सौंपा किन्तु आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला । पूर्व सांसद, पूर्व राज्यसभा सांसद से सिर्फ आश्वासन ही मिला । सपा से वर्तमान सांसद छोटे लाल सिंह खरवार को पत्रक सौंपा किन्तु सांसद द्वारा आश्वासन दिया गया कि समाजवादी पार्टी सरकार बनने पर उन्हें नौकरी तत्काल दी जायेगी । रॉबर्ट्सगंज के पूर्व विधायक एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अविनाश सिंह कुशवाहा से मिलकर पत्रक सौंपा जिस पर पूर्व विधायक द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव को पत्र लिखा गया जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा आश्वासन दिया गया जल्द मुलाक़ात के लिए ।
तत्कालीन जिलाधिकारी एस. राजलिंगम एवं चंद्रविजय सिंह द्वारा जनपद के औद्योगिक कारखानों को पत्र लिखा गया किन्तु कारखानों द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी ।
1 दिसम्बर 2024 को लव वर्मा के पिता बाबू लाल वर्मा का हृदयगति रुकने से निधन हो चुका है जो अनपरा तापीय परियोजना से 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे,पिता के निधन से यह खिलाड़ी अब दर-दर की ठोकरें खा रहा है, आवास के लिए भी कई बार गुहार लगा चुका है किंतु जमीन न होने का हवाला देकर जिला प्रशासन ने भी पल्ला झाड़ लिया है जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी चन्द्रविजय सिंह द्वारा रॉबर्ट्सगंज के बहुअरा ग्राम निवासी रामबाबू को उनके खेल उपलब्धियों पर जमीन दिया जब दिव्यांग अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी को आवास देने की बारी आई तो अधिकारियों द्वारा सरकारी नियमों का हवाला दिया गया कि जमीन नहीं है इसलिए आवास नहीं दिया जा सकता । इस दिव्यांग क्रिकेटर को आज तक सरकार तो दूर किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा किसी भी प्रकार का सहयोग इन 11 वर्षों में नहीं मिला । जहाँ प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुखिया खेलों,खिलाड़ियों के लिए कई घोषणाऐं कर रहे हैं, खिलाड़ियों पर धनवर्षा, रोजगार मुहैया करा रहे हैं लेकिन जनपद सोनभद्र के इस एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेटर पर कब नजर पड़ेगी ये कोई भी जनप्रतिनिधि नहीं बता सकता ।



