सोन संगम के तरफ से किया गया,ब्रह्मा जी के मानस पुत्र देवर्षि नारद और रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती का आयोजन
सोनभद्र (अरविंद गुप्ता)

साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम शक्तिनगर की ओर से किया गया,ब्रह्मा जी के मानस पुत्र देवर्षि नारद तथा कविकुल गुरु रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती काआयोजन।
संयुक्त रूप से मनाई गई दोनों महानुभावों की जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी तथा काव्य गोष्ठी के माध्यम से किया गया देवर्षि नारद एवं रविंद्र नाथ टैगोर के सर्वांगीण स्वरूप की चर्चा।
साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम शक्तिनगर की ओर से, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र देवर्षि, नारद एवं ,हिंदी ,बांग्ला ,अंग्रेजी के विद्वान, नोबेल पुरस्कार विजेता, कविकुलगुरु रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, डॉ अभय शंकर द्विवेदी, विभागाध्यक्ष हिंदी, अवधूत भगवान राम, पी जी कॉलेज अनपरा रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि द्वय के रूप में ,डॉ अर्चना मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी तथा डॉ देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ,असिस्टेंट प्रोफेसर , हिंदी विभाग ,अवधूत भगवान राम, पी जी कालेज,अनपरा रहे ।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ,श्री विनय कुमार अवस्थी ,अपर महाप्रबंधक तकनीकी सेवाएं ,एनटीपीसी शक्तिनगर रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ सर्व प्रथम श्री बद्री प्रसाद केसरवानी के द्वारा अतिथियों के स्वागत गान तथा भाषण के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के आयोजन की उपादेयता एवं विषय की स्थापना करते हुए,डा मानिक चंद पांडेय ने कहा कि ,आज का यह दिन अत्यंत सुखद एवं अविस्मरणीय है, जहां एक और हम लोग भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र, पत्रकारिता के , आद्य महर्षि नारद जी की जयंती मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दो दो देशों को अपनी राष्ट्रगान देने के साथ-साथ ,भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता, कविकुलगुरु रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती मना रहे हैं। हम सभी के लिए आज का दिन बड़ा ही उत्तम तथा श्रेष्ठ है ।मुख्य अतिथि के रूप में पधारे, डॉ अभय शंकर द्विवेदी ने, शांति निकेतन एवं रविंद्र नाथ टैगोर के अंतः संबंधों से जुड़े कई ज्ञानवर्धक एवं

सूचनात्मक तथ्य प्रस्तुत किया ।उन्होंने शांतिनिकेतन में ,अपने रिसर्च के दौरान बिताए गए समय को और वहां की प्राकृतिक सुषमा की बहुत ही मनोहारी वर्णन किया।अन्य गांव में वक्ताओं में,डा अर्चना मिश्रा, अरविंद कुमार सर्राफ इत्यादि ने अपने महत्त्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किया।
दूसरे सत्र में श्री रमाकांत पांडे जी द्वारा गणेश वंदना के उपरांत दोनों महापुरुषों को संगीत के माध्यम से श्रद्धा सुमन उपस्थित कवियों द्वारा किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री विनय कुमार अवस्थी ने रविंद्र नाथ टैगोर को अपनी श्रद्धा सुमन कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया
कलाकार संगीतकार कवि गुरुदेव से नाम पहचान।
नोबेल पुरस्कार सम्मानित भारत माता पुत्र महान।
सात मई को जन्म हुआ तो सात अगस्त अंतिम प्रयाण।
हिंदी बंगला अंग्रेजी मैं काव्य सृजन प्रतिभा विद्वान।
विशिष्ट अतिथि के रूप में आई डॉ अर्चना मिश्रा ने अपनी अभिव्यक्ति कुछ इस अंदाज में बयां किया है
नागफनी यों के गली में फूल का व्यापार मेरा।
मुख्य अतिथि डॉ अभय शंकर द्विवेदी ने अपनी पंक्तियां लोगों के समक्ष इस प्रकार व्यक्त किया
कैसे करें एहसास जवानी आ गई है।
कैसे पता चले सबको जवानी आ गई है।
डॉ देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने रविंद्र नाथ टैगोर के प्रति अपने श्रद्धा सुमन कुछ इस प्रकार लोगों के समक्ष रखें
गुरुजी फिर से आ जाना हमारे भारत देश में।
नई ऊर्जा दे जाओ इस हमारे देश में।
अपनी कता एवं गजलों के लिए मशहूर बहर बनारसी ने काव्य गोष्ठी की आबोहवा को बदलते हुए, अपनी ग़ज़ल को इस प्रकार पेश किया
उधर जाता नहीं हूं मैं, जिधर अच्छा नहीं लगता।
अकेले जिंदगीभर का सफर अच्छा नहीं लगता।
माहिर मिर्जापुरी ने अपनी कविता उपस्थित लोगो को सुनाकर मंत्र मुग्ध कर दिया
यह तेरा प्यार ही तो है,
जो तुझे सिर्फ पाना चाहता है।
डा बीना सिंह रागी ने अपनी गीतो के द्वारा काव्य गोष्ठी को इस प्रकार नई ऊर्जा प्रदान किया
ओ विधि के तुम नियंता तुमको है ,उल्लाहनाएं।
ओ विधि के नियंता तुमको हम देते हैं उल्लाहनाए।
इस काव्य गोष्ठी का संचालन कर रहे ,रमाकांत पाण्डेय ने अपनी कविता कुछ इस तरह से लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया
क्रोध के आवेश में अज्ञान हो जाता महान।
सिर पर सवार हो तो ज्ञान हर लेता है।
अन्य कवियों में डॉ योगेंद्र मिश्र, श्रीमती विजयलक्ष्मी पटेल श्री अरविंद कुमार सराफ इत्यादि ने भी काव्य पाठ किया है। कार्यक्रम का संचालन श्री रमाकांत पाण्डेय के द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ अनिल कुमार दुबे ने किया ।राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। इस कार्यक्रम में श्री मदन लाल ,मुकेश रेल, घन श्याम ,अच्छे लाल ,अवधेश,डा रजनीकांत,डा छोटेलाल ,सुश्री रंजू कुमारी, पवन,अंकित, बी बी पटेल,उदय नारायण पांडेय के साथ साथ अनेक लोग उपस्थित रहे।




