जंगल सुरक्षित कर दुनिया को आईना दिखा रहे हैं पौशिला के आदिवासी!


म्योरपुर/सोनभद्र(विकास अग्रहरि)
सोनभद्र जनपद के सबसे दुरूह, पहाड़ों से घिरा हुआ और संचार सुविधाओं से पूरी तरह से कटा हुआ आदिवासी समुदाय बहुतायत ग्राम पंचायत जुगैल के पौशिला टोले के लोगों यह काम किया है जो अन्य समाज के लिए एक आईना का काम कर रहा है। पौशिला टोला में मुख्य रूप से बैगा जाति के लगभग 60 परिवार निवास करते है। वे सभी लोग मिलकर अपने गांव के किनारे सामूहिक रूप से मिलकर सैकड़ो हेक्टेयर जंगल संरक्षित कर कर रहे हैं। पौशिला निवासी कलंदर मुखिया, विक्रम, नरायन, मिश्रीलाल, जागबली, शंभू, सत्यकार, रामनारायण,रघुबर व

शंकर, अमृतलाल का कहना है कि जंगल में कुल्हाड़ी की आवाज सुनाई देने या जंगल में आग लगने पर बचाने के लिए पूरा गांव दौड़ पडता है। यह काम जुगैल पंचायत के पौशिला, करवनियां, पचपेडि़या, भडा़ही, गर्दा, पुसरेव, चाडम सहित अनेक टोले के लोग जंगल बचाने में सचेत है, जिन्हें हम पिछड़ा समाज से संबोधित करते हैं। जिन्हें अगड़ा समाज कहते है वे खनन कर सोन नदी खत्म कर रहे हैं।
कलंदर मुखिया, जगशाह बैगा का कहना है यह प्रेरणा आश्रम से मिला है। यहां कोई पढा़ लिखा नहीं था 1992 से 2005 तक में आश्रम द्वारा बालमंदिर, रात्रिशाला चलाया गया जिसमें पढ़कर सैकड़ो बच्चे समाज के अगुआ का काम कर रहे हैं। उसी मिले ज्ञान और समझ से अपना जीवन आगे बढा़ रहे हैं। उसी स्थान पर सरकारी स्कूल चल रहा है। वर्तमान समय में सामुदायिक विकास कार्यक्रम से गांव का संगठन मजबूत हो रहा हैं। बीते दिन पौशिला गांव के जल संरक्षण पर योजना बनाने के उद्देश्य से भ्रमण किया गया। इस अवसर पर लोक विज्ञान केंद्र देहरादून के वैज्ञानिक राजेश कुमार, उमेश कुमार चौबे, देवनाथ भाई, सुभाषचंद्रा, बिहारी लाल, राजेन्द्र, अमृतलाल, बाबूलाल आदि उपस्थित रहे।


