साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम की ओर से विश्व लीवर दिवस के अवसर पर किया गया आयोजन
सोनभद्र। (अरविंद गुप्ता )
साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम की ओर से विश्व लीवर दिवस के अवसर पर किया गया आयोजन। सीधी जिले के वरिष्ठ कवि श्री हरिहर प्रसाद विश्वकर्मा सुमन जी का किया गया सम्मान।
साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम शक्तिनगर की ओर से विश्व लीवर दिवस के अवसर पर संगोष्ठी तथा काव्य संध्या काआयोजन किया गया।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि,मध्य प्रदेश सीधी से पधारे बघेली भाषा के ,प्रसिद्ध कवि, श्री हरिहर प्रसाद विश्वकर्मा सुमन,विशिष्ट अतिथि डा श्रीमती बीना सिंह रागी रही।कार्यक्रम की अध्यक्षता, एनटीपीसी शक्तिनगर के अपर महाप्रबंधक तकनीकी सेवाएं श्री विनय कुमार अवस्थी ने किया कार्यक्रम का श्री गणेश पुष्प कुछ माल्यार्पण के उपरांत, बद्री प्रसाद केशरवानी, बजरंग के द्वारा
अतिथियों के स्वागत भाषण से हुआ ,तदुपरांत डॉ बीना सिंह रागी के द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए, डा मानिक चंद पांडेय ने कहा कि, आज का यह अवसर बड़ा ही मुफीद है। आधुनिक परिवेश में जहां आम आदमी भागदौड़ की जिंदगी जीने को विवश है, वही सेहत को लेकर उसे जितनी सावधानी रखनी चाहिए,वह नहीं कर पा रहा है। आज विश्व लिवर दिवस है। हम अपने लीवर को कैसे स्वस्थ रखें, जिससे हमारा स्वास्थ्य ठीक बना रहे ।आज के परिवेश की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि, हम तमाम तरह की जंक फूड के चक्कर में, सीजनल फल फ्रूट को खाना भूल चुके हैं। लीवर स्वस्थ रखने के लिए जामुन तथा उससे बने प्रोडक्ट को खाना लीवर के लिए स्वास्थ्यवर्धक है। अन्य वक्ताओं में , डा अनिल कुमार दुबे , डा छोटे लाल, डा रण वीर सिंह इत्यादि ने भी अपने विचार रखे।
काव्य संगोष्ठी का संचालन करते हुए डॉ योगेंद्र मिश्र ने, अपनी प्रसिद्ध कविता ,हवा ही हवा है। हुआ कुछ नहीं है, से शुरू किया।इस कविता के काव्य गोष्ठी के लिए एक कविता की जमीन तैयार कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री हरिहर प्रसाद विश्वकर्मा ने अपनी कविता कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया
तन क्यों रंगते हो कान्हा ,
मेरा मन रंग डालो ना।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे, विनय कुमार अवस्थी ने अपनी कविता कुछ इस पंक्तियों से प्रस्तुत किया जो अत्यंत समसामयिक थी
एक राजनेता कहता हम कट्टर इमानदार जी।
बहुत चतुर चालाक फरेबी संलिप्त भ्रष्टाचार जी।
डॉ बीना सिंह रागी ने अपने मन की बात कुछ इस प्रकार अंदाज ए बयां किया
अपनों से अपने आप वफा कर देखिए,
पांव मां के आप दबा कर के देखिए।
वरिष्ठ कवि माहिर मिर्जापुरी ने अपनी कविता कुछ इस प्रकार पेश किया
वे कब्रिस्ता में मका बनाए लोग।
जमी तंग हो गई कहां जाएंगे लोग
रमाकांत पाण्डेय, ने अपनी बहुचर्चित कविता काहे बोलेला बोलिया कठोर भैया से लोगों को मन मुक्त कर दिया। एन टी पी सी के कर्मचारी वीरेंद्र कुमार चौरसिया ने,अपने संस्कार गीत के द्वारा लोगों का मन मोह लिया। धन्यवाद ज्ञापन श्रवण कुमार के द्वारा किया गया।इस कार्यक्रम में सीताराम,मुकेश रेल,की सक्रिय भूमिका रही।
इस अवसर पर डा रजनी कांत,मानचंद मौर्य,नंद किशोर,श्रीमती विजय लक्ष्मी पटेल,मनोरमा,संजना,पूजा कुमारी के साथ साथ अन्यान्य लोग उपस्थित रहे।



