भगवान परशुराम जयंती के आयोजन को लेकर किया गया बैठक
चोपन/ सोनभद्र- गुड्डू मिश्रा

नगर के वैरियर स्थित डाक बंगले पर भगवान परशुराम जयंती आयोजन को लेकर कोर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आहुत की गई जिसकी अध्यक्षता स्वामी केशवदास महराज ने की वहीं बैठक में बतौर मुख्य अतिथि के रूप उपस्थित पं. अमरेश चंद्र पाठक ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि
परशुराम जी त्रेता युग (रामायण काल) में एक ब्राह्मण ऋषि के यहाँ जन्मे थे। जो विष्णु के छठा अवतार हैं । पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म महर्षि भृगु के पौत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इन्दौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार हैं। महाभारत और विष्णुपुराण के अनुसार परशुराम जी का मूल नाम राम था किन्तु जब भगवान शिव ने उन्हें अपना परशु नामक अस्त्र प्रदान किया तभी से उनका नाम परशुराम जी हो गया। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम कहलाए। वे जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम जी कहलाये। आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से शार्ङ्ग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ। तदनन्तर कैलाश गिरिश्रृंग पर स्थित भगवान शंकर के आश्रम में विद्या प्राप्त कर विशिष्ट दिव्यास्त्र विद्युदभि नामक परशु प्राप्त किया। शिवजी से उन्हें श्रीकृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच, स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए। चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें त्रेता में रामावतार होने पर तेजोहरण के उपरान्त कल्पान्त पर्यन्त तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया।
अपने संबोधन के समापन में बताया की भगवान परशुराम न्याय एवं अन्याय के संघर्ष धर्म संस्थापना हेतु प्रतिबद्ध है अतः जब भी मानव जाति संकट में आएगी तब तब भगवान परशुराम को स्मरण किया जाता रहेगा | वहीं आलोक चतुर्वेदी ने कहा कि आगामी 21 अप्रैल को रावट्सगंज रामलीला मैदान में होने वाले ब्राह्मण सम्मेलन आप सभी अधिक से अधिक संख्या में पहुचे और कार्यक्रम को सफल बनावें|
कार्यक्रम में मुख्य रूप से पं. विजयानंद तिवारी, सुरेश तिवारी, संजीव तिवारी, मुरली दत्त पाठक, कमलेश चौबे,श्री कांत दूबे, मोती लाल पाण्डेय,गुड्डू मिश्रा, ज्ञानेंद्र पाठक, अरुनेश पाण्डेय, जितेंद्र मिश्रा,श्यासुंदर मिश्रा, राकेश उपाध्याय,सुशील पाण्डेय, मिंटू तिवारी,राहुल दुबे,आचार्य पं दिलिप पाण्डेय, अनील तिवारी,अरविंद दुबे,सुनील पाठक, ह्दयनरायन पाण्डेय, अंजनी तिवारी,राधारमण पाण्डेय, विनय मिश्रा, कृपा मिश्रा, अखिलेश पाण्डेय, सत्यदेव पाण्डेय, पप्पु दुबे, विकास चौबे, अंकित पाण्डेय,विकास तिवारी, घनश्याम पाण्डेय,आर्यन दुबे, प्रियांशु चौबे, आंशु उपाध्याय आदि मौजूद रहे संचालन मनोज चौबे ने किया|



