सोनभद्र

असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

ऐतिहासिक पारम्परिक मेले में उमड़ी भीड़, श्रीराम-रावण युद्ध के हजारों बने साक्षी

मां दुर्गा की प्रतिमाएं भारी सुरक्षा के बीच विसर्जित

दुद्धी, सोनभद्र। स्थानीय क्षेत्रों में असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। खेल मैदान पर लगने वाली पारम्परिक मेले में इस बार एैतिहासिक भीड़ उमड़ी। मेले में आयोजित होने वाले श्रीराम रावण युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी बन आनन्द लेने वाले हजारों महिला-पुरूष श्रद्धालुओं की भीड़ जमी रही। सुर्यास्त होते ही श्रीराम के बाणों से रावण धराशायी हुआ। इसके साथ ही 51फिट उंची रावण का पुतले को जलाया गया। इस दौरान नगर की स्थापित मां दुर्गा की चारों प्रतिमाएं भी शक्ति के रूप में श्रीराम-रावण युद्ध की साक्षी बनी रही। इसके उपरान्त धराशायी रावण ने श्रीराम-लखन को राजधर्म की शिक्षा दी। रावण दहन के बाद रामलीला कमेटी दुद्धी द्वारा आयोजित भव्य आतिजबाजी नजारा देखने को मिला।इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। समारोह को सम्बोधित करते हुए श्रवण सिंह गोंड ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी अहंकारी व अत्याचारी रावण का अन्त हुआ।इससे हमें अपने जीवन एवं समाज में छिपे अन्धकाररूपी रावण का अन्त करना बहुत जरूरी है। जिससे समाज व देश आगे की ओर प्रगति करे। अन्त में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मां दुर्गा की प्रतिमाएं नगर के शिवाजी तालाब में विसर्जित की गयीं। लोग देर रात तक एक-दूसरे के गले मिलकर विजयादशमी की बधाईयां देते रहे। इस दौरान एडिशनल एसपी त्रिभुवन नाथ, सीओ प्रदीप सिंह चंदेल, कोतवाल मनोज कुमार सिंह, कस्बा चौकी इंचार्ज एम पी सिंह, सुरक्षा व्यवस्था में पूरी तरह मुस्तैद रहे। वहीं आयोजन समिति रामलीला कमेटी अध्यक्ष जितेन्द्र श्रीवास्तव, महामंत्री कमल कानू, कोषाध्यक्ष संदीप गुप्ता, पंकज जायसवाल, सुरेन्द्र अग्रहरि, नीरज जायसवाल, बालकृष्ण जायसवाल, डॉ केके चौरसिया, डॉ मिथलेश कुमार सहित सैकड़ो गणमान्य उपस्थित रहे।

देर शाम विसर्जित हुईं देवी प्रतिमाएं

दुद्धी, सोनभद्र। तहसील मुख्यालय पर नवरात्रि पर्व पर स्थापित देवी प्रतिमाएं कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंगलवार की देरशाम शिवाजी तालाब में विधि विधान पूर्वक विसर्जित किया गया| मां काली मंदिर,संकट मोचन,पंचदेव.एवं रामनगर के शिव मंदिर समेत आसपास के क्षेत्रों में स्थापित प्रतिमाओं को रथ पर सवार कर उन्हें नगर भ्रमण कराया गया| सभी प्रतिमाएं विभिन्न मार्गों से भ्रमण करते हुए खेल मैदान पर पहुंची| वहां रावण दहन के पश्चात सभी प्रतिमाएं एक साथ होकर देरशाम शिवाजी तालाब पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ| आयोजकों द्वारा विधि विधान पूर्वक मातारानी की विदाई कर उन्हें अगले साल आने के लिए आमंत्रित किया| इस मौके पर तालाब के सभी घाटो पर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी| इसके अलावा विसर्जन के दौरान किसी प्रकार के हादसे की गुंजाइश न र रहे।

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