सोनभद्र

निर्धारित सीमा और पर्यावरण मानकों को ताक पर रखकर हो रहा बालू खनन

दुद्धी क्षेत्र के कोरगी व नगवां में चल रहा काश्तकारी खनन

दुद्धी, सोनभद्र। दुद्धी तहसील क्षेत्र में कोरगी और नगवां क्षेत्र में बालू का खनन पट्टा काश्तकारी पट्टे संचालित हैं। बालू साइट पर खनन करा रहे लोगों को सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के साथ ही बाहुबलियों का संरक्षण बताया जाता है। इन बालू साइडों पर निर्धारित सीमा और पर्यावरण मानकों का ख्याल रखकर ही खनन करने के निर्देश हैं लेकिन खननकर्ताओं के लिए इसको लेकर बनी नीति और जारी निर्देश मायने नहीं रखते। इलाके के लोगों के मुताबिक ताजा हालत यह हैं कि जहां कोरगी स्थित कनहर नदी और नगवां स्थित नदी में पानी के बीच से पोकलेन के जरिए बालू निकाला जा रहा है। संबंधित मामले को देखने, जांच करने के नाम पर लटकाए हुए हैं। इन साइटों पर नदी के बीच में हो रहे खनन की बालू निकालने के लिए बनाए जा रहे रास्ते को मजबूती देने के लिए हजारों हरे पेड़ों को काट दिया गया है। दिलचस्प मामला यह है कि प्रशासन जहां इसे खनन, पर्यावरण और वन महकमे से जुड़ा मसला बता रहा है। वहीं वन विभाग काश्तकारी एरिया में पेडों की कटान होने की बात कह पल्ला झाड़ ले रहा है। ग्रामीणों पर यकीं करें तो एक-एक साइट पर बालू पर पड़ी मिट्टी के नीचे पेडों की डालें और टहनियां पाटने के लिए चार से पांच हजार पेड़ काटे गए हैं। इसमें अधिकांश पेड़ बबूल एवं अन्य प्रजाति के हैं। बबूल की आड़ लेकर जहां कटान को वैध ठहराया जा रहा है। वहीं वन क्षेत्र में हो रही कटान को काश्तकारी का ठहरा दिया जा रहा है। सवाल उठता है कि काश्तकारी में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की मौजूदगी संभव है? यह स्थिति तब है जब कुछ दिन पूर्व ही सोनभद्र में महज दो वर्ष के भीतर जंगल की एरिया 103.54 वर्गकिमी घटने की बात प्रकाश में आई है।

ना पत्थरगडी, ना पिलर, मनमाना खनन:

जब भी किसी बालू साइट के संचालन की अनुमति दी जाती है तो उसकी एक एरिया निर्धारित की जाती है। उसका सीमांकन कर पत्थरगडी करने और चौहद्दी के आधार पर चारों कोनों पर पिलर लगाकर खनन करने का नियम है। इसी तरह नदी में उसी गहराई तक बालू खनन की इजाजत है, जहां तक पानी नहीं मिल जाता। हरे पेड़ों की कटान की नौबत़ आती है तो इसके लिए भी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है लेकिन जलावनी लकड़ी लाने वाले ग्रामीणों पर केस लादने वाली वन विभाग की टीम को पेड़ों की कटान नजर नहीं आ रही।

–कराएंगे जांच, नियमों की अनदेखी मिली तो करेंगे कार्रवाई:

ज्येष्ठ खान अधिकारी जेपी द्विवेदी कहते हैं कि सीमांकन के लिए निर्देश दिए गए हैं। एरिया से बाहर तथा पानी से बालू निकालना गलत है। इसकी जांच करवाएंगे, जिस भी साइट पर गड़बडी मिलेगी, कार्रवाई की जाएगी।

Md.shamim Ansari

मु शमीम अंसारी कृषि स्नातकोत्तर (प्रसार शिक्षा/जर्नलिज्म) इलाहाबाद विश्वविद्यालय (उ.प्र.)

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