सोनभद्र

भूमि सम्बन्धी जन सुनवाई कार्यक्रम में उमड़ा आदिवासियों का सैलाब

विगत 15 वर्षों में भूमि विवाद में आई बाढ़ में आदिवासियों का हो रहा शोषण-विजय सिंह गोंड

जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर गोंडवाना भवन दुद्धी में आधे दर्जन संथाओं ने आयोजित की कार्यक्रम

दुद्धी, सोनभद्र। जल, जंगल और जमीन को लेकर अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन के तत्वाधान में सोमवार को नगर के गोंडवाना परिसर में जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जमीन से संबंधित मामलों को लेकर आदिवासी महिला-पुरुषों का सैलाब उमड़ पड़ा। आदिवासियों को संबोधित करते हुए यूनियन की अध्यक्ष सुकालो देवी ने कहा कि कोविड के बहाने भूमिहीन, कृषि मजदूर, वन श्रमजीवी, प्रवासी मजदूर, मछुआरा वर्ग यानी आम श्रमजीवी वर्ग की आजीविका एक और नए संकट में ढकेल दिया गया। पिछले कुछ वर्षों में लोगों की आवाज दबाने का एक नया दौर शुरू हो गया। कोविड-19 से निपटने के लिए जो तरीके अपनाए गए उसमें जातीय व धार्मिक अत्याचार हुए। वन क्षेत्रों में वन श्रमजीवियों के ऊपर लगातार हमले होते रहे हैं। यह प्रक्रिया कोविड और लाकडॉउन की आड़ में बढ़ गई। वनाधिकार कानून हमें जंगल में रहने का अधिकार देता है। सरकार की जिम्मेदारी तय करता है कि वह वन आश्रितों को जमीन और लघु वन उपज पर उनके मालिकाना अधिकार को मान्यता दे, लेकिन सरकार इस कानून का उल्लंघन करते हुए हमारे हकों को छीन कर हमें जंगल से उजाड़ने की साजिश रच रही है ताकि जमीन और वन संपदा को पूजीपतियों के हवाले किया जा सके। आदिवासियों के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड ने कहा कि विगत 15 वर्षों में दुद्धी क्षेत्र में भूमि विवाद के मामलों में बाढ़ सी आ गई है। वन आश्रित समुदाय के लोगों को कोविड और लाकडॉउन के दौरान जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें एक साथ कहना और दस्तावेज में तब्दील करके सरकार की जवाबदेही तय करना हम सभी के लिए महत्वपूर्ण कार्य है। इस कार्य में लोगों की सामूहिक भूमिका जरूरी है। कोविड के समय जब हम मौत, बीमारी, भुखमरी व लाचारी से जूझ रहे थे। दुद्धी क्षेत्र का मजदूर शहरों से अपनी मजदूरी छोड़कर जब भूखे पेट हजारों मील पैदल अपने गांव वापस आ रहे थे, तो सरकार कहां थी। जब हमको जंगल क्षेत्र से बेदखल करने के लिए नोटिस दिए जा रहे थे और हमारी संपत्ति को उजाड़ा जा रहा था तो सरकार कहां थी। एक तरफ हम इन समस्याओं से जूझ रहे थे तो दूसरी तरफ खेत खलिहान और सड़कों पर हमें परेशान करने के लिए पुलिस को छूट किसने दी थी इसका जवाब लिया जाएगा।
कार्यक्रम में कैमूर क्षेत्र मजदूर किसान संघर्ष समिति, पाठा दलित आदिवासी अधिकार मंच, कैमूर मुक्ति मोर्चा, ग्राम वनाधिकार समिति के पदाधिकारियों सहित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट दिल्ली से प्रिया, सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस वाराणसी से मुनीजा खान, संघर्षशील महिला राजकुमारी, वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद पाठक, जिला पंचायत सदस्य जुबेर आलम, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अभिनय जायसवाल, सपा युवा नेता राजु शर्मा सहित भारी संख्या में आदिवासी महिला पुलिस मौजूद थे।

Md.shamim Ansari

मु शमीम अंसारी कृषि स्नातकोत्तर (प्रसार शिक्षा/जर्नलिज्म) इलाहाबाद विश्वविद्यालय (उ.प्र.)

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