सोनभद्र

लगातार दूसरे दिन भी मिला दुद्धी क्षेत्र में डेंगू का मरीज, आमजन दहशत में

(दुद्धी सीएचसी में डेंगू से पीड़ित भर्ती यश कुमार)

दुद्धी के रजखड़ गांव में मिला डेंगू का दूसरा केस

(रजखड़ गांव में ग्रामीणों का ब्लड सैंपल लेती स्वास्थ्य विभाग की टीम)

दुद्धी, सोनभद्र (मु. शमीम अंसारी/भीम जायसवाल)। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका अभी पूरी तरह खत्म भी नही हुआ है। इसी बीच मौसमी बुखार, मलेरिया, टायफाइड के साथ डेंगू ने दुद्धी क्षेत्र में पैर पसार लिए है।
पहला केस बुधवार को कस्बे से सटे धनौरा गांव में मिला तो दूसरा केस नगर की दूसरी सीमा पर बसे रजखड़ गांव में मिला। दुद्धी के पड़ोसी गांवों में मिल रहे संक्रामक बीमारियों के केसों ने न केवल ग्रामीण बल्कि शहरी क्षेत्र के लोगों को भी दहशत में ला दिया है। गुरुवार को डेंगू का दूसरा केस 19 वर्षीय यश कुमार पुत्र विमलेश कुशवाहा निवासी रजखड़ के रूप में मिला। यश पहली सितंबर को वाराणसी संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) देने गया था। वाराणसी से लौटने के बाद उसकी तबियत खराब लगने लगी। 7 सितंबर मंगलवार को उसे तेज बुखार आया तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। दवा कराने के बाद भी स्थिति में सुधार न होने की दशा में गुरुवार को उसे दुद्धी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां डॉ विनोद सिंह के परामर्श पर उसकी मलेरिया, टायफायड, सीबीसी और डेंगू जांच कराई गई। जिसमें प्रयोगशाला प्राविधिक सीताराम ने जांच में डेंगू की पुष्टि की। डेंगू की रिपोर्ट आते ही चिकित्सक ने उसे तत्काल सीएचसी पर संक्रामक रोगों से निपटने के लिए गठित स्पेशल वार्ड में भर्ती कर लिया। उधर क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन मिले डेंगू के मरीज पर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग सक्रियता दिखाते हुए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज इक्का के नेतृत्व में फार्मासिस्ट संजय श्रीवास्तव प्रयोगशाला, प्रयोगशाला प्राविधिक संजय कुमार, बीपीएम संदीप सिंह जैसे स्वास्थ्यकर्मियों की टीम रजखड़ गांव पहुंचकर अभिभावक विमलेश कुशवाहा सहित घर के पूरे सदस्यों का रक्त परीक्षण किया। इसके अलावा घर के अगल-बगल स्थित पड़ोसियों के लोगों का भी बुखार व तबियत खराब जैसी बीमारी की शिकायत पर रक्तपट्टिकाएं बनाकर उनकी भी मलेरिया टाइफाइड व डेंगू जांच की गई। मौके पर उपस्थित ग्रामीणों को डॉ मनोज एक्का ने डेंगू के लक्षणों व बचाव के तरीकों को बताते हुए कहा कि इसके मरीज का 2 से 7 दिवस तक तेज बुखार चढता है एवं इसके साथ निम्‍न में से दो या अधिक लक्षण भी साथ में होते हैं। अचानक तेज बुखार, सिर में आगे की और तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने से दर्द में और तेजी, मांसपेशियों (बदन) व जोडों में दर्द, स्‍वाद का पता न चलना व भूख न लगना, छाती और ऊपरी अंगो पर खसरे जैसे दानें, चक्‍कर आना, जी घबराना उल्‍टी आना, शरीर पर खून के चकते एवं खून की सफेद कोशि काओं की कमी, बच्‍चों में डेंगू बुखार के लक्षण बडों की तुलना में हल्‍के होते हैं। डेंगू बुखार से बचाव के उपाय की जानकारी देते हुए डॉ एक्का ने बताया कि छोटे डिब्‍बो व ऐसे स्‍थानो से पानी निकाले जहॉं पानी बराबर भरा रहता है। कूलरों का पानी सप्‍ताह में एक बार अवश्‍य बदले। घर में कीट नाशक दवायें छिडके। बच्‍चों को ऐसे कपडे पहनाये जिससे उनके हाथ पांव पूरी तरह से ढके रहे। सोते समय मच्‍छरदानी का प्रयोग करें। मच्‍छर भगाने वाली दवाईयों/ वस्‍तुओं का प्रयोग करें। टंकियों तथा बर्तनों को ढककर रखें। सरकार के स्‍तर पर किये जाने वाले कीटनाशक छिडकाव में सहयोग करें।
आवश्‍यकता होने पर जले हूये तेल या मिट्टी के तेल को नालियों में तथा इक्कट्ठे हुये पानी पर डाले। रोगी को उपचार हेतु तुरन्‍त सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र दुद्धी में ले आएं।

Md.shamim Ansari

मु शमीम अंसारी कृषि स्नातकोत्तर (प्रसार शिक्षा/जर्नलिज्म) इलाहाबाद विश्वविद्यालय (उ.प्र.)

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