सोनभद्र

कॉउंटिंग एजेंट बनने के लिए कॅरोना रिपोर्ट की अनिवार्यता लागू किये जाने के बाद सीएचसी में उमड़ी भीड़

शोशल डिस्टेसिंग की उड़ रही धज्जियां

चुनाव ड्यूटी होने के कारण एलटी न होने से जांच की रफ्तार बेहद सुस्त

दुद्धी, सोनभद्र (मु.शमीम अंसारी/भीम जायसवाल)। पंचायत चुनाव की मतगणना में प्रतिभाग करने वाले कॉउंटिंग एजेंटों के पास बनवाने में कॅरोना की रिपोर्ट अनिवार्य किये जाने के बाद प्रत्याशियों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। संदर्भित सूचना मिलने के बाद सैकड़ों प्रत्याशी अपने एजेंटों को साथ स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर कॅरोना जांच कराने की प्रक्रिया में जुट गए। लेकिन अन्य प्रयोगशाला तकनीकियों की ड्यूटी चुनाव में लग जाने के कारण जांच कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। कमरा न.13 में संचालित गैर संचारी रोग अत्याधुनिक लैब में संजय कुमार मौर्य (एलटी) व स्टाफ नर्स सुषमा के साथ डॉट्स के एसटीएलएस विष्णु दयाल और प्रयोगशाला सहायक सौरभ पांडे जांच की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। लेकिन क्षेत्र में ग्राम प्रधान और बीडीसी के करीब पांच-पांच सौ प्रत्याशी और ग्राम पंचायत सदस्य 1400 सौ से ऊपर यानी कुल 2598 प्रत्याशी है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंदर आने वाले तीन जिला पंचायत क्षेत्र विंढमगंज के 12, बघाडू के 31 और धनौरा के 9 प्रत्याशी शामिल है। जिला पंचायत सदस्य की कुल 52 प्रत्याशियों में अगर एक-एक प्रत्याशी 10-10 एजेंट भी बनाना शुरू करें तो करीब 500 की संख्या इनकी भी पहुंच जाती है। इन परिस्थितियों में तीन हजार से ऊपर लोगों की करोना जांच करना मात्र 48 घंटे के अंदर यह नामुमकिन है। जिला पंचायत सदस्य बघाडू के प्रत्याशी समाजवादी सपा प्रत्याशी जुबेर आलम, जोरुखाड़ के प्रधान प्रत्याशी विमल यादव, जिला पंचायत धनौरा की प्रत्याशी अनिता गोंड़, ग्रामसभा तुर्रीडीह के प्रधान प्रत्याशी विद्यवन्त, रन्नू ग्राम प्रधान प्रत्याशी लखनधारी, मझौली ग्राम प्रधान प्रत्याशी मनोज कुशवाहा आदि ने बताया कि पूर्व में तहसील स्तर पर एक आर नियुक्ति होती थी लेकिन इस बार मात्र एक आर ओ बनाकर जिले पर बैठा दिया गया है। जिससे प्रत्याशियों को सही सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि हर प्रत्याशी के नामांकन फार्म में मोबाइल नंबर भरा हुआ है। इसके बावजूद किसी प्रत्याशी को फोन करके यह नहीं बताया जा रहा है कि एजेंट बनने की क्या प्रक्रिया है। पूछने पर बताया गया कि कॅरोना की रिपोर्ट जरूरी है तो लोग भागकर अस्पताल पहुंचे जहां स्वास्थ्य कर्मियों ने दोपहर तक तो जांच की मगर लोगों की बढ़ती भीड़ को देख उनका कहना था कि इतनी भीड़ का हम कैसे बना पाएंगे इसके लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रत्याशियों ने यह भी कहा कि भारी संख्या में उमड़े मतदाताओं को कॅरोना जांच नही कराई गई। जबकि कॉउंटिंग एजेंट कम संख्या में होते हैं उनकी कराई जा रही है।

Md.shamim Ansari

मु शमीम अंसारी कृषि स्नातकोत्तर (प्रसार शिक्षा/जर्नलिज्म) इलाहाबाद विश्वविद्यालय (उ.प्र.)

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