सोनभद्र

निजीकरण, महंगाई और कारपोरेट के खिलाफ आइपीएफ कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन

किसान आंदोलन ने मोदी के कारपोरेटपरस्त चेहरे को किया बेनकाब

सोनभद्र। संयुक्त किसान मोर्चा और संयुक्त ट्रेंड यूनियन्स के आवाहन पर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट, जय किसान आंदोलन से जुड़े मजदूर किसान मंच, वर्कर्स फ्रंट और युवा मंच के कार्यकर्ताओं ने निजीकरण, महंगाई और कारपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ घोरावल तहसील, म्योरपुर, दुद्धी व बभनी में प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के बारे में प्रेस को जानकारी देते हुए आज जारी बयान में आइपीएफ के जिला संयोजक कांता कोल, मजदूर किसान मंच के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद गोंड़ व प्रवक्ता कृपाशंकर पनिका ने बताया कि कार्यकताओं ने विरोध प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति को पत्रक भेजा। पत्रक में पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की बढ़ी कीमते वापस लेने, देश के सार्वजनिक उद्योगों व प्राकृतिक सम्पदा के निजीकरण को खत्म करने, किसान विरोधी तीनों काले कृषि कानूनों और मजदूर विरोधी लेबर कोड रद्द करने, विद्युत संशोधन विधेयक 2021 को वापस लेने, वनाधिकार कानून के तहत जमीन का पट्टा देने व बेदखली पर दरोक लगाने, रोजगार के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने, मनरेगा में 150 दिन काम व बकाया मजदूरी के भुगतान जैसी मांगों को उठाया गया है।
विरोध प्रदर्शनों में वक्ताओं ने कहा कि जारी किसान आंदोलन आज जनांदोलन बन चुका है। इस आंदोलन ने मोदी सरकार की कारपोरेट परस्त चेहरे को बेनकाब कर दिया है। देश में तानाशाही थोपने के जिस प्रोजेक्ट पर आरएसएस-भाजपा काम कर रहे थे किसान आंदोलन ने उनके मंसूबों को चकनाचूर कर दिया है। यहां तक की आरएसएस-भाजपा का लम्बे समय से आधार बने व्यापारी वर्ग ने भी जीएसटी और उत्पीड़न के खिलाफ अब आंदोलन शुरू कर दिया है। देश में इन आंदोलनों ने हर देशभक्त नागरिक के मन में आशा की किरण पैदा की है कि मोदी सरकार की देशी विदेशी कारपोरेट को देश बेचने मंशा कामयाब नहीं होगी। विरोध प्रदर्शन में वक्ताओं ने वन विभाग द्वारा हाईकोर्ट की अवमानना करते हुए आदिवासियों व नाश्रितों की बेदखली करने पर गहरा रोष प्रकट करते हुए कहा कि वन विभाग की मनमानी व उत्पीड़न से जनपद में कभी भी उभ्भा जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो सकती है। इसलिए प्रशासन को अतिशीध्र वनाधिकार में पट्टा देने का काम करना चाहिए।
विभिन्न जगहों पर हुए कार्यक्रमों का नेतृत्व मंगरू प्रसाद गोंड़, राजेन्द्र प्रसाद गोंड़, सूरज कोल, श्रीकांत सिंह, रामदास गोंड़, शिव प्रसाद गोंड़, महावीर गोंड,़ मनोहार गोंड़, कैलाश चैहान, केशें मौर्या, संवालाल कोल, देव कुमार विश्वकर्मा, राम्फल गोंड़, तेजधारी गुप्ता आदि ने किया।

Md.shamim Ansari

मु शमीम अंसारी कृषि स्नातकोत्तर (प्रसार शिक्षा/जर्नलिज्म) इलाहाबाद विश्वविद्यालय (उ.प्र.)

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