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जनसंख्या वृद्धि विकास में बाधक, सिंगल चाइल्ड पॉलिसी की जरूरत – अशोक विश्वकर्मा

जनसंख्या वृद्धि देश की सबसे गंभीर समस्या है, जिस पर सभी को विचार करने की जरूरत है,क्योंकि यह समस्या देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए जब तक इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होगा तब तक हर क्षेत्र में विकास की योजनाएं लड़खड़ाती रहेंगी और संसाधनों की कमी बनी रहेगी।
उक्त बातें विश्व जनसंख्या नियंत्रण जागरूकता दिवस के अवसर पर आल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने जनसंख्या वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कही…उन्होंने कहा विश्व जनसंख्या दिवस हर वर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है जिसका उद्देश्य जनसंख्या संबंधित समस्याओं पर वैश्विक चेतना जागृत करना है। इसकी शुरुआत 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गवर्निंग काउंसिल ने की थी। उन्होंने कहा मौजूदा समय में भारत की जनसंख्या लगभग 1 अरब 35 करोड़ के आसपास है। भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। आजादी के समय भारत की जनसंख्या 33 करोड़ थी जो आज लगभग 4 गुना हो गई है। इसका मुख्य कारण अशिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव, अंधविश्वास और विकासात्मक असंतुलन है। संभावना है कि 2050 तक देश की जनसंख्या 1.6 अरब हो जाएगी। फिलहाल भारत की जनसंख्या विश्व जनसंख्या के अनुपात में 17. 5 फ़ीसद है। भारत का भूभाग 2.5 फीसद तथा 4 फीसद जल संसाधन है, जबकि विश्वभर में होने वाली बीमारियों की तुलना में 20 फीसद अकेले भारत में है। विश्व की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है उसके हिसाब से प्रत्येक वर्ष 8 करोड़ से अधिक लोगों की वृद्धि हो रही है। इसका दबाव प्राकृतिक संसाधनों पर भी पड़ रहा है। देश में युवा तथा कार्यशील जनसंख्या की अधिकता तथा उसके होने वाले आर्थिक लाभ को जनसंख्या लाभ के रूप में देखा जाता है… भारत में मौजूदा समय में सर्वाधिक जनसंख्या युवाओं की है। यदि इनका उपयोग भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में किया जाए तो यह विकास के प्रत्येक क्षेत्र में सर्वाधिक लाभ प्रदान करने वाला होगा किंतु यदि शिक्षा गुणवत्तापरक न हो, रोजगार के अवसर सीमित हों, स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुरक्षा के साधन उपलब्ध न हों तो बड़ी कार्यशील आबादी एक अभिशाप का रूप धारण कर सकती है। भारत में मौजूदा समय में युवा एवं कार्यशील जनसंख्या अत्यधिक है, लेकिन उनके लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं इसी संदर्भ में अभी हाल में ही प्रधानमंत्री ने भी जनसंख्या नियंत्रण की बात कही है सुप्रसिद्ध कवि बालकवि बैरागी ने कई दशक पहले हम दो हमारे दो का बहुचर्चित नारा दिया था जो परिवार नियोजन के अभियान में प्रयुक्त हुआ था। अब जनसंख्या नियंत्रण जागरूकता की दिशा में “हम दो हमारे एक” का नारा अत्यंत उपयोगी और सार्थक साबित हो सकता है। देश के विकास के लिए चीन की जनसंख्या नियंत्रण नीति की तरह सिंगल चाइल्ड पॉलिसी पर विचार करने की आवश्यकता है।

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