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यादो के झरोखे से-आईपीएस राजेश पांडेय (डीआइजी) की सोनभद्र मे पहली पोस्टिंग और उनके द्वारा किये गये एनकाउंटर कहानी

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सोनभद्र (नौशाद अन्सारी) जी हा हम बात कर रहे है आइपीएस राजेश पांडेय का जिन्होने प्रदेश मे करीब 3 दशको से अपराध और राजनीति के चेहरे को बदलकर रख दिया है।राजेश पांडेय ने पुलिस के लिये सिरदर्द बन चुके कई अपराधियों का एनकाउंटर किया है।उन्होने पहला एनकाउंटर दुद्धी मे क्षेत्राधिकारी रहने के दौरान किया।आइये आज आपको ले चलते है 3 दशक पूर्व सोनभद्र मे।राजेश पांडेय जी ने बातचीत मे बताया के आइपीएस बनने के बाद ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 1 दिसंबर 1990 को मेरी पहली पोस्टिंग सोनभद्र मे बतौर क्षेत्राधिकारी के रूप मे हुआ।उन्होने बताया के उस समय मोबाइल फोन नही था।लैंडलाइन का जमाना था।बस से मै पहुच गया एक सूटकेस लेकर सोनभद्र।बस अड्डे पर उतरा।उस समय वहा से राबर्ट्सगंज थाना जाने का कोई साधन नही था तो मै रिक्शा पकड़कर राबर्ट्सगंज थाना चला गया।इंस्पेक्टर साहब बाहर आये उन्होने कहा के आप के मेरे कमरे मे वर्दी पहन ले।यहा से 10 किलोमीटर दूर चुर्क सीमेंट फैक्ट्री है वही पर एसपी आफिस है टेंपरेरी बना हुआ है।वही पर एसपी साहब मिलेंगे।जब मै वहा पहुचा तो अस्थाइ रूप से टिन शेड मे बने एसपी आफिस में एसपी साहब के एन टी द्विवेदी बैठे हुये थे।जनपद के सभी सीओ और इंस्पेक्टर वहा बैठे हुये थे।उस जमाने मे वहा 3 ही सीओ हुआ करते थे कोइ एडिशनल एसपी नही होते थे।

उस समय एसपी साहब क्राइम की मीटिंग ले रहे थे।मै एकाग्र चित्त होकर उनकी बातो को सुन रहा था और समझ रहा था कि क्राइम मीटिंग में किस किस तरह की बाते की जाती है।बीच बीच मे कप्तान साहब कुछ थानेदारो पे नाराज भी हुये शोर भी मचाया,शाबाशी भी दी।जब सब चले गये तो उन्होने मुझे बैठाया और कहा कि तुम अभी नये हो बहुत जल्दी तुम्हारी पोस्टिंग मै करूँगा।यहा के देहात की सर्किल पे मै तुम्हे रखूंगा।उस समय मुझे पुलिस के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नही थी जो ट्रेनिंग मे मुझे बताया गया था उतना ही जानकारी था।उसके बाद मुझे चुर्क सीमेंट फैक्ट्री में रोका गया।3 दिन बाद मेरी पहली पोस्टिंग दुद्धी क्षेत्राधिकारी के रूप मे हुआ।दुद्धी सर्किल उस समय बिहार और मध्य प्रदेश के बार्डर से सटा हुआ था।दुद्धी एक छोटा सा कस्बा है चारो तरफ से पहाड़ी है।वहा कनहर नदी हुआ करती थी।वहा पर,4 सरकारी मकान बने हुये थे।पहला ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट के लिये दूसरा क्षेत्राधिकारी के लिये तीसरा एसडीएम के लिये चौथा फारेस्ट के एसडीओ के लिये।उस समय जुडिशल मजिस्ट्रेट वी डी मिश्रा हुआ करते थे उन्ही के बगल मे मुझे सरकारी मकान अलाट हुआ जिसमे मुझे रहने के लिये कहा गया।बहुत बड़ा सा तालाब था वहा पर।कच्ची सड़क थी वहा तक पहुचने के लिये।तीन थाने उस समय हुआ करते थे बीजपुर,कोन और दुद्धी।तीनो थाने का मैने भ्रमण किया।उस समय नई नई मेरी शादी हुई थी।10 दिन बाद मै अपने माता पिता और पत्नी के साथ उस सरकारी आवास मे आ गया।कुछ दिन रहने के बाद मेरे माता पिता जी वापस इलाहाबाद चले गये।1991 मे उस समय इलेक्शन डिक्लेयर हुआ था।इलेक्शन का कार्य जोर शोर से चल रहा था।

एक दिन आफिस से निकल कर मै घर गया तो देखा दर्जन की संख्या मे औरते अपने बच्चो के साथ आइ थी।सभी औरते घुंघट के साथ अपना चेहरा ढकी हुइ थी।मैने उनसे पूछा कि आप लोग कैसे यहा आइ है।सभी औरतो ने कहा साहेब हम लोग आपसे मिलने आये है और आपकी मैडम को अपनी बातो को बताया है।घर मे गया और श्रीमती से पूछा क्या बात है श्रीमती जी बहुत डरी हुई थी और कहा कि यह जगह यहा रहने के लिये नही है।आप उन्ही लोगों से पूरी बात पूछ लीजिये।उसके बाद बाहर गया तो महिलाओ ने बताया के एक दबंग व्यक्ति ने दो 13-14 वर्षीय बच्ची के साथ दुर्व्यवहार किया है।दोनो बच्चिया सामने आइ और उसके बाद महिलाओ ने जो किस्सा सुनाया उसके बाद दिल दहल गया।उस समय इलेक्ट्रानिक मीडिया नही था।उस समय दुद्धी मे टेलीफोन तक नही था।हम लोगो को कोइ बात डीएम महोदय,एसपी महोदय को बतानी होती थी तो दुद्धी से 30 किलोमीटर दूर हिंडालको जाकर सारी बात टेलीफोन से हम लोग आला अधिकारी को सारी बात बताते थे।महिलाओ ने बताया के दबंग व्यक्ति रोज शाम को शराब पी लेते है और बच्चियो,महिलाओ के साथ दुर्व्यवहार करते है।दुर्व्यवहार की पराकाष्ठा की सीमा पार कर देते है।और और यह कोइ एक दो दिन की बात नही है यह उनका रोज रोज का काम है।

एक जमाने मे जब यह जिला मिर्जापुर का भाग हुआ करता था।उस समय अंग्रेजो के जमाने मे मिर्जापुर मे डीएम विंडम हुआ करते थे।बताया गया ऐसी जन भ्रांतिया है के डीएम विंडम यहां 14 साल रहे।उस समय घोड़े से चलते थे उस समय चलने का कोइ और साधन नही था।कोन थाने का अगर इंस्पेक्शन करना होता था तो वहां टेंट लगता था और वहा महीने रहा करते थे।जंगलो मे शिकार करते थे और उनके तमाम आदतो के बारे मे लोगो ने वहा बताया।खाना खाकर मै दुद्धी कोतवाली गया और इंस्पेक्टर से मिला।उस समय दुद्धी इंस्पेक्टर पांडेय जी थे।मैने इंस्पेक्टर से कहा के महिला शिकायत कर रही है तो उन्होंने कहा कि महिलाये हमेशा ऐसे ही शिकायत करती रहती है ध्यान ना दे।कहा साहब इन सब चक्कर मे न पड़े इलेक्शन का समय है।इन सब बातो पे ध्यान ना दे।तो मैने कहा कोइ सच्चाइ तो होगी।

इंस्पेक्टर ने कहा ऐसा कुछ है आदिवासी के साथ उक्त व्यक्ति शराब पीकर दुर्व्यवहार करता है पहले भी मुकदमे लिखे गये है।हम समझा देंगे उसे।इस तरह से कहकर बात को टाल दिया गया।मेरा ड्राइवर था उस समय कांस्टेबल अब्दुल्ला।नीले रंग की जीप थी उस समय।उस समय दुद्धी मे जायसवाल जी चेयरमैन हुआ करते थे।उसके बाद दूसरे लोगो से पता लगाया दुर्व्यहार की बात सच निकली।बाद मे जायसवाल जी जो चेयरमैन हुआ करते थे।उन्होने भी दबी जुबान मे बताया की यह बाते सच है।अब्दुल्ला ड्राइवर ने बताया कि साहब उक्त व्यक्ति शराब के नशे में निकला है तो आनन फानन मे मै भी उसके पीछे निकल पड़ा उस समय कनहर नदी मे पुल नही था किसी को पार करना होता था तो गाड़ी को उस नदी से ही चला कर पार करते थे।पता लगने पर कि वह आदमी कनहर नदी पार कर चुका है हम लोग भी गाड़ी से उसके पीछे निकले।उस समय चौकी इंचार्ज विंडमगंज मे कोइ यादव हुआ करते थे।उनको मैने वायरलेस सेट पे उक्त व्यक्ति के बारे मे सुचना दिया।विंडमगंज चौकी इंचार्ज के साथ मैने पीछा किया तो बाइक से 3 लोग बंदूक के साथ विंडमगंज गढवा रोड से जा रहे थे।अक्सर वे लोग लोगो को बार्डर क्षेत्र मे अपराधिक गतिविधिया करते थे।जब हम लोगो ने रोकने की कोशिश किया तो रुके नही और मुठभेड एक व्यक्ति को गोली लगी।2 लोग भाग गये।उक्त व्यक्ति मुठभेड़ मे मारा गया।

उसके बाद वाले से मुठभेड़ की सूचना अधिकारी को दी गइ।रात में ही लिखा पढ़ी हुइ। कप्तान साहब ने वायरलेस किया और नाराजगी भरे शब्दो मे कहा ये तुमने क्या किया।मैने अपनी बात रखी और बताया के मुठभेड़ हुआ जिसमे उक्त व्यक्ति मारा गया।एसपी साहब ने कहा मै आ रहा हु।एसपी साहब दुद्धी आये मौके पर तो उन्होंने बहुत शाबाशी दी।पीडब्ल्यूडी का एक छोटा सा गेस्ट हाउस भी दुद्धी मे था।उसी मे एसपी साहब ने मुझे बुलाया और कहा के चुनाव का समय है कम से कम मुठभेड़ के पहले मुझे तो बताते। बाद में उन्होने दुद्धी इंस्पेक्टर,सब इंस्पेक्टर को बुलाया और कहा के उक्त मुठभेड़ का लिखा लिखा पढ़ी कराइये।उसके बाद काफी लोग शाम को वहा इकट्ठा हुये।थाने पे आये और सब लोगो ने इस बात पर संतोष जताया के साहब हम लोग बहुत त्रस्त थे बहुत अच्छा काम हुआ।

राजेश पांडेय जी ने अपनी सफलता को अपने माता पिता को समर्पित करते हुए कहा के
“सख्त राहों में भी आसान सफ़र लगता है
ये मेरी माँ की दुआओं का असर लगता है”
“बुलंदियों का बड़े से बड़ा मुकाम छुआ
उठाया गोद में माँ ने तब आसमान छुआ”

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