सोनभद्र

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में गीता जयंती की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

शक्तिनगर/सोनभद्र महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में गीता जयंती की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी परिसर, शक्तिनगर में हिंदी विभाग ,,की ओर से ,गीता ऑर गांधी,, विषय पर संगोष्ठी का किया गया आयोजन।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी ,के कुलपति ,प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी ,के संरक्षण एवं एनटीपीसी कैंपस शक्ति नगर के कार्यकारी निदेशक, डॉ चंद्रशेखर सिंह ,के निर्देशन में गीता जयंती की पूर्व संध्या पर, हिंदी विभाग, की ओर से ,,गीता और गांधी,, विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम के प्रारंभ में संगोष्ठी के संयोजक, डॉ मानिक चंद पांडेय ने विषय की स्थापना करते हुए बताया कि, महात्मा गांधी के व्यक्तित्व पर गीता का गहरा प्रभाव पड़ा था। गांधी जी अपनी रचना, गीतामाता में कहते हैं कि ,एक माता जो जन्म देती है, वह एक दिन छोड़कर चली जाती है। किंतु यह गीतामाता सदैव हमारे साथ रहती हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में श्री संजय कुमार पांडेय, वरिष्ठ प्रबंधक एनटीपीसी विंध्याचल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, गीता भगवान श्री कृष्ण के द्वारा गाया गया गीत है। जिसमें 5 मूल विषयों का उपदेश गीता में दिया है ।जीवन शाश्वत नहीं है। भगवान श्री कृष्ण ने कुल 45 मिनट में संपूर्ण उपदेश दिया है। गीता के 41 श्लोक संजय के द्वारा, 83 श्लोक अर्जुन के द्वारा, एक श्लोक धृतराष्ट्र के द्वारा तथा 575 श्लोक श्री कृष्ण के द्वारा सुनाया गया है ।इंद्र से कुरू ने वरदान मांगा था ,कुरुक्षेत्र के लिए कि ,ऐसी जमीन देना,जहा धर्म की स्थापना की फसल पैदा हो सके। धृतराष्ट्र को वेदव्यास, पराशर मुनि, विदुर जैसे 67 गुरुओं ने ज्ञान दिया था ।किंतु धृतराष्ट्र आसक्ति नहीं छोड़ सका। युद्ध का कारण दुर्योधन नहीं, धृतराष्ट्र है।
डा प्रदीप कुमार यादव ने महात्मा गांधी के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए महात्मा गांधी ने, विवेकानंद को,गीता संबंधी प्रश्नों का जवाब उनको नहीं दे सके थे, जिससे कहीं न कहीं वे विचलित थे। जिसके कारण उन्होंने बाइबल, गीता इत्यादि का अध्ययन किया। अन्य वक्ताओं में डॉ छोटेलाल प्रसाद जायसवाल, श्री उदय नारायण पांडेय के साथ-साथ ,छात्र/छात्राओं की ओर से, मनोरमा कुमारी ,आंचल कुमारी, आर्या चौबे, काजल, सानिया , मनीष कुमार इत्यादि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। साजिदा खातून, उजाला, ज्योति कुमारी, के साथ-साथ अन्यान्य छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डा मानिक चंद पांडेय के द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन बी ए . थर्ड सेमेस्टर की छात्रा मनोरमा कुमारी ने दिया।

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